भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद ने ओडिशा के हितधारकों की सतत एवं जलवायु-अनुकूल श्री अन्न उत्पादन में क्षमता की सुदृढ़

भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद ने ओडिशा के हितधारकों की सतत एवं जलवायु-अनुकूल श्री अन्न उत्पादन में क्षमता की सुदृढ़

11 अगस्त, 2026, हैदराबाद

कृषि उत्पादन के समक्ष बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता से उत्पन्न नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, आईसीएआर–भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–आईआईएमआर), वैश्विक उत्कृष्टता केन्द्र, हैदराबाद ने 11 से 14 अगस्त, 2026 तक “सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए उन्नत श्री अन्न  उत्पादन प्रौद्योगिकियां” विषय पर चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया है।

यह कार्यक्रम ओडिशा मिलेट मिशन चरण-II परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ओडिशा के विभिन्न ब्लॉकों का प्रतिनिधित्व करने वाले हितधारक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन आज भाकृअनुप–आईआईएमआर, हैदराबाद, में किया गया। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर के हितधारकों की उन्नत श्री अन्न उत्पादन संबंधी तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना तथा उन्हें किसानों को जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने में प्रभावी सहयोग प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना है।

ICAR–IIMR, Hyderabad Strengthens Odisha Stakeholders’ Capacity in Sustainable and Climate-Resilient Millet Production

उद्घाटन सत्र के दौरान प्रशिक्षण की संरचना तथा चार दिवसीय कार्यक्रम में शामिल किए जाने वाले प्रमुख विषयों का अवलोकन प्रस्तुत किया गया। इस बात पर बल दिया गया कि यह कार्यक्रम केवल कक्षा-आधारित शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक क्षेत्रीय परिस्थितियों और विस्तार संबंधी आवश्यकताओं से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

प्रशिक्षण की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। इसमें उन्नत किस्मों, गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादन प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया। क्षेत्रीय स्तर के हितधारकों को व्यावहारिक ज्ञान से सुसज्जित करने के महत्व को रेखांकित किया गया, ताकि अनुसंधान-आधारित प्रौद्योगिकियों का किसानों तक प्रभावी हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके तथा उत्पादकता और कृषि-स्तरीय लचीलापन बढ़ाने में योगदान दिया जा सके। बाजरा उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं, जिनमें उन्नत उत्पादन पद्धतियों और सतत दृष्टिकोणों के महत्व को रेखांकित किया गया, जिससे बाजरा खेती को बढ़ावा मिल सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्नत बाजरा उत्पादन एवं जलवायु-लचीली खेती की पद्धतियों के साथ-साथ आईसीआरआईसैट का व्यावहारिक भ्रमण, एफपीओ गतिविधियां, श्री अन्न आधारित मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियां, क्षेत्रीय प्रदर्शन तथा एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं। प्रतिभागियों को वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा भाकृअनुप–आईआईएमआर में श्री अन्न उत्पादन एवं संबंधित प्रौद्योगिकियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिलेगा।

ICAR–IIMR, Hyderabad Strengthens Odisha Stakeholders’ Capacity in Sustainable and Climate-Resilient Millet Production

कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसका “करते हुए सीखना” तथा क्षेत्र-केन्द्रित ज्ञान हस्तांतरण पर आधारित दृष्टिकोण है। वैज्ञानिक सत्रों, तकनीकी संवादों और व्यावहारिक अनुभवों के संयोजन के माध्यम से यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों को न केवल यह समझने में सहायता करेगा कि कौन-सी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है, बल्कि यह भी कि उसे किसानों की वास्तविक परिस्थितियों में कैसे और कहाँ प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है।

यह अपेक्षा की जा रही है कि यह कार्यक्रम तकनीकी रूप से सक्षम हितधारकों का एक ऐसा समूह तैयार करेगा, जो ओडिशा में ज्ञान-विस्तारक के रूप में कार्य करते हुए संस्थान से उन्नत बाजरा उत्पादन प्रौद्योगिकियों को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। प्रतिभागी नमी की कमी, अनियमित वर्षा, घटती मृदा उर्वरता, कीट एवं रोगों की समस्याओं तथा संसाधनों के अकुशल उपयोग जैसी चुनौतियों से निपटने में किसानों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकेंगे, जिससे अधिक उत्पादक और लचीली बाजरा-आधारित कृषि प्रणालियों के विकास में योगदान मिलेगा।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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