19 मई, 2026, हैदराबाद
ऐसे समय में जब कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, पोषण असुरक्षा और घटते प्राकृतिक संसाधनों जैसी बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहा है, देशभर के वैज्ञानिक और नीति-निर्माता विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान (यूएएस), धारवाड़ में एकत्र हुए। यहां भाकृअनुप-एआईसीआरपी की पर्ल मिलेट (61वीं वार्षिक समूह बैठक), ज्वार (56वीं वार्षिक समूह बैठक) और लघु मिलेट्स (37वीं वार्षिक समूह बैठक) की संयुक्त वार्षिक बैठक के दौरान श्री अन्न अनुसंधान तथा सतत कृषि प्रणालियों के भविष्य पर विचार-विमर्श किया गया। यह कार्यक्रम 18 से 20 मई, 2026 तक आयोजित किया गया, जबकि उद्घाटन सत्र 19 मई 2026 को यूएएस, धारवाड़ में सम्पन्न हुआ।

यूएएस धारवाड़ और भाकृअनुप–भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), हैदराबाद श्री अन्ना पर वैश्विक उत्कृष्टता केन्द्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देशभर से लगभग 200 वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मिलेट सुधार, सतत उत्पादन और मूल्य संवर्धन तकनीकों के भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. डी.के. यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप, ने वर्तमान कृषि परिदृश्य में समन्वित मिलेट अनुसंधान के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच मजबूत और लचीली कृषि प्रणालियों के निर्माण के लिए फसल सुधार, संसाधनों के कुशल उपयोग और तनाव-सहिष्णुता से संबंधित वैज्ञानिक प्रगति अत्यंत आवश्यक है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पी.एल. पाटिल, कुलपति, यूएएस, धारवाड़, ने कहा कि कर्नाटक मिलेट अनुसंधान, खेती तथा नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। उन्होंने बताया कि यूएएस धारवाड़ और भाकृअनुप-आईआईएमआर द्वारा किसानों के हित में विकसित तकनीकों, उन्नत किस्मों और मूल्यवर्धित मिलेट उत्पादों से पोषण सुरक्षा और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
डॉ. एस.के. प्रधान, सहायक महानिदेशक (एफएफसी), भाकृअनुप, ने भविष्य की खाद्य, चारा तथा पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समन्वित मिलेट अनुसंधान कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. अशोक एस. सज्जन, अनुसंधान निदेशक, यूएएस धारवाड़, ने कृषि और पोषण संबंधी भविष्य की चुनौतियों से निपटने में समन्वित मिलेट अनुसंधान कार्यक्रमों की भूमिका पर जोर दिया।
डॉ. (श्रीमती) सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएमआर, हैदराबाद, ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के बाद मिलेट आधारित उद्यमों, एफपीओ, स्टार्टअप और खाद्य उद्योगों के लिए वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व अवसर उत्पन्न हुए हैं।

बैठक के दौरान वर्ष 2025-26 के लिए पर्ल मिलेट, ज्वार और लघु मिलेट सुधार कार्यक्रमों के अंतर्गत वार्षिक अनुसंधान प्रगति और प्रमुख उपलब्धियों की प्रस्तुति भी दी गई।
कार्यक्रम में तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन, उत्कृष्ट अनुसंधान केन्द्रों का सम्मान तथा मिलेट अनुसंधान में योगदान देने वाले सेवानिवृत्त वैज्ञानिकों का अभिनंदन भी किया गया। तीन दिवसीय बैठक में आगे फसल सुधार, उत्पादन तकनीकों, मूल्य संवर्धन और देश में मिलेट विकास की भावी प्राथमिकताओं से संबंधित उन्नत अनुसंधान रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय मिलेट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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