भाकृअनुप-आईआईएसएस, भोपाल और कोर कार्बनएक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने कृषि स्वैच्छिक कार्बन बाजार परियोजनाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

भाकृअनुप-आईआईएसएस, भोपाल और कोर कार्बनएक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने कृषि स्वैच्छिक कार्बन बाजार परियोजनाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

29-30 अगस्त, 2026, नई दिल्ली

‘कृषि स्वैच्छिक कार्बन बाजार परियोजनाओं का डिजाइन और कार्यान्वयन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 29–30 अगस्त को नई दिल्ली में किया गया।

कार्यशाला का आयोजन कोर कार्बनएक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल और जीआईजेड इंडिया के सहयोग से जलवायु अनुकूलन, लचीलापन और ग्रामीण भारत में जलवायु वित्त (सीफरी -II) परियोजना के अंतर्गत किया गया।

कार्यक्रम में 16 कृषि अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और किसान-केंद्रित कृषि कार्बन परियोजनाओं के डिजाइन के लिए तकनीकी क्षमता को मजबूत करना था।

ICAR-IISS, Bhopal and Core CarbonX Solutions Pvt. Ltd. Organize National Workshop on Agricultural Voluntary Carbon Market Projects

उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. अमरेश कुमार नायक, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप, ने मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई और भारत में विश्वसनीय तथा पारदर्शी स्वैच्छिक कार्बन बाजार विकसित करने में वैज्ञानिक संस्थानों तथा सक्षम नीतिगत ढांचे की भूमिका पर जोर दिया।

डॉ. मनोरंजन महांती, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएसएस, ने समन्वित जलवायु और सतत विकास परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय मिशनों को कार्बन बाजार पहलों के साथ एकीकृत करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों को रेखांकित किया गया, जिसमें विस्तार योग्य एवं समावेशी कृषि कार्बन परियोजनाओं को समर्थन देने में जलवायु वित्त की भूमिका पर जोर दिया गया। कृषि प्रणालियों में कार्बन निष्कासन और टाले गए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के परिमाणीकरण के लिए वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ दृष्टिकोण पर भी चर्चा की गई।

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तकनीकी और समूह सत्रों में कार्बन परियोजना के संपूर्ण चक्र को शामिल किया गया, जिसमें आधाररेखा निर्धारण, कार्यप्रणाली का चयन, ग्रीनहाउस गैस लेखांकन, परियोजना डिजाइन दस्तावेज तैयार करना, हितधारक परामर्श, सुरक्षा उपाय, निगरानी, रिपोर्टिंग और सत्यापन (एमआरवी), प्रमाणीकरण तथा स्वतंत्र सत्यापन शामिल थे।

प्रतिभागियों ने छोटे जोत वाले किसानों को शामिल करने, डिजिटल एमआरवी, मापन लागत को कम करने, परियोजना वित्त, बाजार संपर्क, पारदर्शी अनुबंधों और विशेष रूप से महिलाओं तथा छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए समान लाभ-साझाकरण जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला का समापन पायलट कार्बन परियोजना डिजाइनों को आगे बढ़ाने के लिए कार्य-योजना अभ्यास के साथ हुआ। इस पहल का उद्देश्य भारत के उभरते कृषि कार्बन बाजार में आईसीएआर संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की तकनीकी भागीदारों के रूप में भूमिका को मजबूत करना है, ताकि विश्वसनीय विज्ञान को किसानों की आजीविका और जलवायु कार्रवाई से जोड़ा जा सके।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल)

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