भाकृअनुप-आईआईपीआर एवं आईसीएआर-अटारी, हैदराबाद द्वारा दक्षिणी राज्यों एवं पुडुचेरी में दलहन उत्पादन बढ़ाने हेतु संयुक्त रूप से खरीफ-पूर्व बैठक का आयोजन

भाकृअनुप-आईआईपीआर एवं आईसीएआर-अटारी, हैदराबाद द्वारा दक्षिणी राज्यों एवं पुडुचेरी में दलहन उत्पादन बढ़ाने हेतु संयुक्त रूप से खरीफ-पूर्व बैठक का आयोजन

22 मई, 2026, कानपुर

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु तथा पुडुचेरी राज्य/केन्द्रशासित प्रदेश के लिए प्रमुख दलहन फसलों की उन्नत प्रौद्योगिकियों के प्रसार हेतु एक ऑनलाइन खरीफ-पूर्व बैठक का आयोजन आज भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईपीआर), कानपुर एवं आईआईपीआर-क्षेत्रीय केंद्र, धारवाड़ तथा भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-अटारी), हैदराबाद द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

भाकृअनुप-आईआईपीआर, कानपुर के निदेशक डॉ. जी.पी. दीक्षित ने राष्ट्रीय दलहन उत्पादन का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करते हुए आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा तमिलनाडु राज्यों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इन राज्यों में दलहनों के क्षेत्रफल और उत्पादन में वृद्धि के लिए जिला-वार क्लस्टर आधारित क्वाड्रेंट दृष्टिकोण पर बल दिया तथा विशेष रूप से अरहर की खेती के लिए रिज-बेड पद्धति अपनाने तथा दलहन फसलों की संभावित उपज प्राप्त करने हेतु उचित खरपतवार प्रबंधन की सिफारिश की।

डॉ. शेख एन. मीरा, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, हैदराबाद, ने क्षेत्र में दलहनों की कम उत्पादकता के गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कम उपज के प्रमुख कारणों, जैसे मृदा की कम उर्वरता, अनियमित वर्षा, कीट एवं रोग प्रकोप तथा उन्नत खेती पद्धतियों को सीमित रूप से अपनाने का उल्लेख किया। इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्होंने उच्च उपज देने वाली एवं रोग-प्रतिरोधी किस्मों के उपयोग, उचित बीज उपचार, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा समय पर फसल सुरक्षा उपायों को अपनाने की सिफारिश की। उन्होंने किसान जागरूकता कार्यक्रमों, क्षेत्रीय प्रदर्शनों तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर भी बल दिया।

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प्रतिभागियों ने खरीफ दलहनों की उन्नत किस्मों तथा उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकियों पर विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) को सामूहिक रूप से खरीफ मौसम में दलहन की कम उपज की समस्या के समाधान के लिए कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों, कीट एवं रोग समस्याओं तथा अपर्याप्त फसल प्रबंधन पद्धतियों सहित प्रमुख योगदानकारी कारकों का विस्तार से उल्लेख किया।

खरीफ दलहनों पर आयोजित इस विचार-विमर्श में तीनों राज्यों के कृषि विभागों के संयुक्त निदेशकों सहित कुल 160 अधिकारियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर)

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