5 सितंबर 2026, हैदराबाद
भाकृअनुप-आईएआरआई हैदराबाद हब ने आज भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा), हैदराबाद में शिक्षक दिवस मनाया, जिसमें विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास को आकार देने में शिक्षकों के अमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए उनका सम्मान किया गया।
इस कार्यक्रम में पद्म श्री डॉ. अरविंद कुमार, पूर्व उप महानिदेशक (शिक्षा), भाकृअनुप तथा पूर्व एवं संस्थापक कुलपति, रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
हैदराबाद स्थित भाकृअनुप संस्थानों के निदेशकों, नोडल अधिकारियों, अनुशासन समन्वयकों, आईएआरआई हैदराबाद हब के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने समारोह में भाग लिया।

डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा ने हब की शैक्षणिक गतिविधियों में संकाय सदस्यों के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। विद्यार्थी प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और अपनी शैक्षणिक यात्रा, व्यक्तित्व विकास तथा समग्र विकास में शिक्षकों की भूमिका के लिए आभार व्यक्त किया।
हैदराबाद स्थित भाकृअनुप संस्थानों के निदेशकों और नोडल अधिकारियों ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों के पोषण, उनके करियर को आकार देने और समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए उन्हें तैयार करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं भी दीं।
डॉ. सिंह ने आईएआरआई हैदराबाद हब की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों का अवलोकन प्रस्तुत किया तथा इसकी उपलब्धियों और विद्यार्थियों की सफलताओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पद्म श्री डॉ. अरविंद कुमार ने हब के शैक्षणिक कार्यक्रम में उनके मूल्यवान योगदान के सम्मान में आईएआरआई हैदराबाद हब के सेवानिवृत्त संकाय सदस्यों को सम्मानित किया।

समारोह का मुख्य आकर्षण डॉ. अरविंद कुमार द्वारा “तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षण पेशे की रक्षा और रूपांतरण” विषय पर दिया गया शिक्षक दिवस व्याख्यान रहा। उन्होंने शिक्षा के विकासक्रम का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से कृषि शिक्षा पर जोर दिया तथा वर्षों के दौरान शिक्षा प्रणाली में किए गए प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डाला।
डॉ. कुमार ने तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा प्रणाली के समक्ष उभरती चुनौतियों को विस्तार से बताया और विशेष रूप से डिजिटल युग में अच्छे शिक्षकों के स्थायी महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षकों की विद्यार्थियों को समाज एवं राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान देने में सक्षम, सर्वांगीण व्यक्तित्व वाले विद्यार्थियों के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक शिक्षक, वार्डन और प्रशासक के रूप में अपने व्यापक अनुभव से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने विद्यार्थियों के साथ अपने बहुमूल्य अनुभव और अंतर्दृष्टि भी साझा की।
कार्यक्रम का समापन शिक्षक-विद्यार्थी संबंध को मजबूत करने तथा शिक्षा, व्यावसायिक विकास और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के स्थायी योगदान को मान्यता देने पर जोर देने के साथ हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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