16 फरवरी, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, ने आज संस्थान के अनुसंधान फार्म में 'पूसा गुलाब और गेंदा फील्ड डे' का आयोजन किया। इस इवेंट की थीम 'गुलाब और गेंदा: विज्ञान, नवाचार तथा किसान की खुशहाली का पुल' था। इसमें यह दिखाया गया कि कैसे नए साइंटिफिक तरीके फूलों की खेती को ज्यादा फायदेमंद और आधुनिक बना रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान, डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने बताया कि फूलों एवं सजावटी पौधों का ग्लोबल मार्केट 60 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा का है। भारत इस सेक्टर में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, फूलों की खेती अब लगभग 2.9 लाख हैक्टर में हो रही है और इससे हर साल लगभग 15,000 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है। उन्होंने बताया कि लैंडस्केपिंग और फूलों की खेती अब सिर्फ़ पुराने शौक नहीं रह गए हैं, बल्कि ये एक बड़ा बिजनेस बन गए हैं जो ग्रामीण भारत में असली दौलत ला सकते हैं।

डॉ. राव ने बताया कि इंस्टीट्यूट ने गुलाब और गेंदे की कई नई और बेहतर वैरायटी दिखाईं। फूलों के बाजार के लिए, 'पूसा शर्बत' और 'पूसा अल्पना' जैसी किस्मों को उनकी सुंदरता, ताज़गी और खुशबू के लिए दिखाया गया था। बगीचों और उद्यान सज्जा के लिए, 'पूसा अभिषेक', 'पूसा अजय', पूसा अरुण और 'पूसा लक्ष्मी' जैसी किस्मों को उनकी मज़बूती एवं चमकीले रंगों के लिए हाईलाइट किया गया।
डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद, परियोजना निदेशक, (डब्ल्यूटीसी), भाकृअनुप-आईएआरआई, ने गुलाब और गेंदे में पानी के इस्तेमाल की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' के बारे में बात की। किसानों ने अफ्रीकन गेंदे की 'पूसा नारंगी गैंडा' और 'पूसा बहार' और फ्रेंच गेंदा की पूसा दीप, पूसा उत्सव, पूसा पर्व और पूसा अर्पिता जैसी गेंदे की किस्मों की भी तारीफ की, जिन्हें उगाना आसान है और ये ज़्यादा समय तक ताजी रहती हैं, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

इस इवेंट में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर से भारी संख्या में किसान आए। दिल्ली जल बोर्ड, सीपीडब्ल्यूडी तथा अलग-अलग बागवानी ऑफिस के अधिकारी भी नए पुष्प विज्ञान और उद्यान सज्जा योजना पर चर्चा करने के लिए शामिल हुए।
गुलाब और गेंदे के फूलों के पीछे के साइंस के बारे में जानने के लिए गलगोटिया यूनिवर्सिटी, हमदर्द यूनिवर्सिटी और एनसीआर सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के स्टूडेंट्स शामिल हुए। फूलों की प्रदर्शनी में उद्योग से जुड़े लोगों ने भी क्षेत्र दिवस में हिस्सा लिया। आकाशवाणी और दूरदर्शन से मीडिया कवरेज के साथ, इस इवेंट ने सफलतापूर्वक यह मैसेज दिया कि विज्ञान के साथ कड़ी मेहनत द्वारा, फूलों की खेती हर किसान को एक बेहतर एवं खुशहाल भविष्य की ओर ले जा सकती है।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें