7–8 मई, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय के सहयोग से 7–8 मई, 2026 को भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली के प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन लाइब्रेरी कॉन्फ्रेंस हॉल में “स्टूडेंट्स गाइड टू साइंस कम्युनिकेशन” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई ने आईएआरआई और डीकेएमए की संयुक्त पहल की सराहना की तथा सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों में करियर बनाने की आकांक्षा रखने वाले कृषि छात्रों के लिए विज्ञान संचार कौशल के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से प्रत्येक तिमाही में आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने अनुसंधान सहयोग, सीएसआर साझेदारी और छात्र प्लेसमेंट के लिए अकादमिक–उद्योग संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इंडस्ट्री मीट्स सहित आईएआरआई द्वारा की गई व्यापक पहलों पर भी प्रकाश डाला।

अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. अनुपमा सिंह, डीन एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा), भाकृअनुप-आईएआरआई ने कार्यशाला के महत्व पर जोर दिया और इसके उद्देश्यों को रेखांकित किया, जिसमें छात्रों की प्रस्तुतीकरण क्षमता, वैज्ञानिक लेखन और अनुसंधान की दृश्यता को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसके बाद डॉ अनुराधा अग्रवाल, परियोजना निदेशक, भाकृअनुप-डीकेएमए ने कार्यशाला का अवलोकन प्रस्तुत किया और छात्रों के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में विज्ञान संचार को नियमित घटक के रूप में शामिल करने की वकालत की।
कार्यशाला के पहले दिन “मास्टरिंग रिसर्च प्रेजेंटेशन्स”, “राइट टू बी रीड” के अंतर्गत आवश्यक अकादमिक लेखन कौशल तथा “पिचिंग विद पर्पस” पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य विभिन्न वर्गों के समक्ष अनुसंधान परिणामों और नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना था।

दूसरे दिन “थ्रू द एडिटर’स लेंस: क्राफ्टिंग बेटर मैन्युस्क्रिप्ट्स”, शोध-पत्र तैयार करने की तकनीकों तथा दस्तावेजीकरण तथा विज्ञान संचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों के उपयोग पर महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने “रिसर्च राइटिंग में नैतिकता” पर भी विचार-विमर्श किया तथा शोध प्रसार और जनसहभागिता को बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रभावी उपयोग पर एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया।
समापन सत्र में प्रतिभागियों की प्रतिक्रियाएँ शामिल थीं तथा आईएआरआई और डीकेएमए के कार्यशाला समन्वयकों द्वारा समापन टिप्पणी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम पूर्ण होने पर सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र वितरित किया गया।
इस कार्यशाला में भाकृअनुप-आईएआरआई के 40 एमएससी एवं पीएचडी छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को शोध संचार, वैज्ञानिक लेखन, एआई-सहायता प्राप्त दस्तावेजीकरण तथा नैतिक अनुसंधान पद्धतियों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल प्रदान किए।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला की सुव्यवस्थित, संवादात्मक और अत्यंत प्रासंगिक प्रकृति की सराहना की तथा एक ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली शिक्षण अनुभव प्रदान करने के लिए आयोजकों और विशेषज्ञ वक्ताओं की प्रशंसा की।







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