7 सितंबर, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने नई दिल्ली में ‘दलहन और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए भारतीय कृषि का पुनर्रुखीकरण’ विषय पर शिक्षक दिवस व्याख्यान 2026 का आयोजन किया।
डॉ. च. श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने शिक्षक दिवस के महत्व और वैज्ञानिक संस्थानों तथा शोधकर्ताओं की पीढ़ियों को आकार देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार व्यक्त किए। डॉ. राव ने मजबूत वैज्ञानिक संस्थानों के निर्माण में लोगों और शिक्षकों की मूलभूत भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि संस्थान केवल उपकरणों, वैज्ञानिक कार्यक्रमों, प्रयोगशालाओं या भवनों से नहीं बनते, बल्कि लोगों से बनते हैं और लोगों को शिक्षक आकार देते हैं।
सभा का स्वागत करते हुए डॉ. अनुपमा सिंह, संयुक्त निदेशक (शिक्षा) एवं डीन, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने शिक्षक दिवस के महत्व और व्यक्तियों, संस्थानों तथा समाज को आकार देने में शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों की अमूल्य भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान, मूल्यों तथा पेशेवरों और शोधकर्ताओं की अगली पीढ़ी को तैयार करने में शिक्षकों की भूमिका स्थायी होती है।

प्रो. आर.बी. सिंह, पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई और पूर्व निदेशक, सीएयू, इम्फाल, ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और वक्ता डॉ. एच.एस. गुप्ता, अध्यक्ष, असम कृषि आयोग, पूर्व महानिदेशक, बीआईएसए और पूर्व निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, नई दिल्ली का परिचय कराया।
प्रो. आर.बी. सिंह ने विचारोत्तेजक व्याख्यान की सराहना की और कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को मजबूत करने में शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों की स्थायी भूमिका को रेखांकित किया।
शिक्षक दिवस व्याख्यान देते हुए डॉ. एच.एस. गुप्ता ने अपने अनुभव साझा किए, जिसमें भाकृअनुप-आईएआरआई के निदेशक के रूप में लगभग पांच वर्षों का उनका कार्यकाल भी शामिल था। डॉ. गुप्ता ने अपने पेशेवर सफर में अपने शिक्षकों और मार्गदर्शकों के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक प्रगति एक सामूहिक प्रयास है और राष्ट्रीय तथा सामाजिक आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए अनुसंधान एवं विकास को आगे बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. गुप्ता ने शिक्षकों के रूप में किसानों की अनूठी भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि किसान केवल कृषि प्रौद्योगिकियों के प्राप्तकर्ता नहीं हैं। क्षेत्र में कार्य करने वाले वैज्ञानिक भी किसानों और कृषि की अनिश्चितताओं तथा जटिलताओं से निपटने के उनके अनुभवों से सीखते हैं। अगली पीढ़ी के प्रति शिक्षकों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए डॉ. गुप्ता ने शिक्षकों से छात्रों को केवल उत्तर सीखने के लिए नहीं, बल्कि प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जहां एक अच्छा वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान करता है, वहीं एक महान वैज्ञानिक ऐसी समस्याओं की पहचान करता है जिनका समाधान करना सार्थक हो। उन्होंने आगे जोर दिया कि “हम नहीं जानते” को स्वीकार करना अक्सर अच्छे विज्ञान की शुरुआत होती है।

डॉ. गुप्ता ने जोर दिया कि भाकृअनुप-आईएआरआई जैसे प्रमुख संस्थान की मजबूती को केवल उसके बुनियादी ढांचे से नहीं मापा जा सकता, बल्कि उसके लोगों की गुणवत्ता, उसकी वैज्ञानिक संस्कृति और उसके द्वारा तैयार किए जाने वाले वैज्ञानिकों से मापा जाता है। संस्थान की विशिष्ट वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ संबद्धता का स्मरण करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि किसी अनुसंधान संस्थान का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम केवल उसके शोध पत्र या प्रौद्योगिकियां नहीं, बल्कि वे वैज्ञानिक हैं जिन्हें वह तैयार करता है।
उन्होंने संकाय सदस्यों से ऐसे छात्रों को तैयार करने का आग्रह किया जो अंततः अपने शिक्षकों से आगे निकल सकें और इसे शिक्षक को मिलने वाली सबसे बड़ी प्रशंसाओं में से एक बताया। व्याख्यान के विषय की ओर आते हुए डॉ. गुप्ता ने भारतीय कृषि में भाकृअनुप-आईएआरआई के ऐतिहासिक योगदान को याद किया और संस्थान की उस भूमिका का उल्लेख किया, जिसमें उसने हरित क्रांति में योगदान देने वाली प्रौद्योगिकियों के सृजन और प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विजन को याद करते हुए उन्होंने जोर दिया कि जहां कई प्राथमिकताएं प्रतीक्षा कर सकती थीं, वहीं कृषि नहीं कर सकती थी।
डॉ. गुप्ता ने दलहन और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में भारत के सामने मौजूद निरंतर चुनौतियों पर प्रकाश डाला और इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फसलों के घरेलू उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तिलहन की उपज में सुधार के महत्व पर चर्चा करते हुए बेहतर प्रौद्योगिकियों, उन्नत किस्मों और कुशल कृषि पद्धतियों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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