भाकृअनुप-आरसीएआर, पटना ने विकसित भारत की ओर एनआरएम कार्य-योजना पर केन्द्रीत करके 26वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

भाकृअनुप-आरसीएआर, पटना ने विकसित भारत की ओर एनआरएम कार्य-योजना पर केन्द्रीत करके 26वां स्थापना दिवस का किया आयोजन

22 फरवरी, 2026, पटना

भाकृअनुप-पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पटना, ने आज अपना 26वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया, साथ ही पूर्वी भारत में कृषि विज्ञान को मजबूत करने तथा किसानों की आजीविका में सुधार के लिए अपने समर्पण को दोहराया।

मुख्य अतिथि, डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (प्रकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप, ने कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी विकास में 25 सालों के समर्पित योगदान के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों एवं स्टाफों की तारीफ की।

ICAR-RCER, Patna Celebrates 26th Foundation Day with a focus on NRM Roadmap towards Viksit Bharat

‘विकसित भारत @2047 के लिए प्रकृतिक खेती प्रबंधन हेतु कृषि अनुसंधान कार्य योजना पर अपने प्रभावकारी स्थापना दिवस संबोधन में, डॉ. नायक ने विकसित भारत @2047 के रष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ प्रकृतिक संसाधन प्रबंधन अनुसंधान को मजबूत करने के लिए एक विस्तृत रणनीति को विस्तार से बताया। उन्होंने अन्य महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्रों के अलावा भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करने, कार्बन क्रेडिट तंत्र को बढ़ावा देने, स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकों को सुनिश्चित करने, उर्वरकों तथा पौधों के पोषक तत्वों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, जैव विविधता का संरक्षण के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल एवं जैव-फोर्टिफाइड फसल किस्मों के विकास जैसी प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया।

डॉ. अनूप दास, निदेशक, भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना, ने पूर्वी भारत में कृषि स्थिरता प्राप्त करने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने संसाधन संरक्षण उपायों के माध्यम से चावल के परती क्षेत्रों को हरा-भरा करने, चावल उत्पादन के विविधीकरण तथा स्थान एवं पारिस्थितिकी तंत्र विशिष्ट एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल के साथ-साथ जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने सहित रणनीतिक हस्तक्षेपों पर जोर दिया ताकि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, जोखिम शमन को बढ़ाया जा सके; जल-उत्पादकता में सुधार के लिए स्मार्ट जल प्रबंधन की प्रौद्योगिकियां और साल भर रोजगार एवं क्षरित भूमि के पुनर्वास के लिए फल-आधारित बहु-मंजिला प्रणाली पर भी उसने प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं जैव विविधता को बचाने के लिए, संस्थान ने खेत एवं बागवानी की 85 तरह की फ़सलें जारी की हैं और मवेशियों, मुर्गी, बकरी तथा बत्तखों की छह देसी नस्लों को रजिस्टर किया गया है।

श्री डी.पी. त्रिपाठी, निदेशक, बीएएमईटी, बिहार सरकार, ने संस्थान को बधाई दी साथ ही बिहार राज्य के कृषि विभाग में इसके योगदान एवं सहयोग की तारीफ़ की। डॉ. अंजनी कुमार, निदेशक, अटारी, पटना; डॉ. एस.के. पुर्बे, निदेशक, भाकृनुप-एमजीएफआरआई, मोतिहारी; डॉ. ए.के. सिंह, निदेशक अनुसंधान, बीएयू, सबौर; तथा  डॉ. आर.के. जाट, वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ, बीसा ने इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित किया तथा इस क्षेत्र के कृषि विकास हेतु अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

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इससे पहले, डॉ. नायक ने संस्थान के सबजपुरा और मेन कैंपस के प्रायौगिक क्षेत्र का दौरा किया, जिसमें स्मार्ट जल प्रबंधन प्रतिमान, आने वाले समय के लिए संरक्षित खेती एवं कृषि-वानिकी प्रयोग, आईएफएस, पशुपालन फार्मों, ब्रीडिंग ट्रायल्स वगैरह शामिल थे, वैज्ञानिकों से बातचीत की और आगे सुधार के लिए कीमती सुझाव दिया।

कार्यक्रम का एक बड़ा आकर्षण नवोन्मेषी कृषक बैठक था जिसमें 11 पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नवोन्मेषी कृषक, मीडिया कर्मियों और संस्थान के बेहतरीन कर्मचारियों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित करना था। इसके अलावा, तकनीकी के व्यावसायिकरन एवं प्रसार को मज़बूत करने के लिए, पाँच एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया साथ ही पाँच प्रकाशन का भी लोकार्पण किया गया।

इस आयोजन में 350 से ज्यादा किसानों के साथ लगभग 650 प्रतिभागियों ने शिरकत की।

(स्रोत: भाकृअनुप-पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, पटना)

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