12-13 जून, 2026, रांची
चल रहे खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत 12-13 जून, 2026 के दौरान भाकृअनुप-आरसीईआर, एफएसआरसीएचपीआर, रांची, में एफपीओ सदस्यों-वैज्ञानिकों-प्रगतिशील किसानों की एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य एफपीओ सदस्यों के बीच जागरूकता पैदा करना और उन्हें संतुलित उर्वरक उपयोग, सतत कृषि पद्धतियों, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और कृषि उत्पादों के विपणन को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
मुख्य अतिथि, डॉ. एस.सी. दुबे, कुलपति, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची, ने अपने संबोधन में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मृदा उर्वरता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने हरी खाद, वर्मी कम्पोस्टिंग/कम्पोस्टिंग, ट्राइकोडर्मा और राइजोबियम (दलहनी फसलों में) से बीज उपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग, कृषि चूने के उपयोग और मृदा संरक्षण उपायों सहित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की वकालत की। उन्होंने किसानों को खरीफ 2026 के दौरान संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए वैज्ञानिक परामर्शों का पालन करने की भी सलाह दी।

झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के विशेष सचिव श्री गोपाल तिवारी ने बताया कि यूरिया के अंधाधुंध उपयोग के कारण झारखंड की लगभग 60 प्रतिशत कृषि भूमि क्षरण के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने 5–10 गांवों के समूहों को शामिल करते हुए एफपीओ के गठन को प्रोत्साहित किया और किसानों से जलवायु-लचीली कृषि, फसल विविधीकरण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण को अपनाने के साथ-साथ फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा एफपीओ के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले कारकों, प्रौद्योगिकी प्रसार में एफपीओ की भूमिका, एफपीओ के लिए नाबार्ड योजनाओं, उर्वरकों, कीटनाशकों आदि के लाइसेंस से संबंधित विषयों पर तकनीकी व्याख्यानों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की गई।

प्रतिभागियों के लिए एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरक, हरी खाद, वेजिटेबल सोयाबीन, ऑफ-सीजन सेम, ग्राफ्टेड टमाटर, परवल, मशरूम उत्पादन, आम उत्पादन, ड्रोन और कीट प्रपंच सहित आशाजनक प्रौद्योगिकियों और उद्यमों का प्रदर्शन किया गया।
केंद्र के एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल और अन्य प्रदर्शन इकाइयों का क्षेत्र भ्रमण भी कराया गया। प्रतिभागियों को आम, अमरूद और लीची के पौधों के साथ-साथ सब्जियों के बीज भी प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, श्रम की कठिनाई को कम करने, श्रमिकों की कमी की समस्या का समाधान करने और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए दो महिला स्वयं सहायता समूहों को दो मैनुअल धान प्रतिरोपक वितरित किए गए।
इस कार्यशाला में 18 एफपीओ के सदस्यों सहित कुल 102 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, एफएसआरसीएचपीआर, रांची)







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