29 जून, 2026, रामगढ़
सतत कृषि को बढ़ावा देने और मृदा स्वास्थ्य की बहाली के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आईसीएआर-पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर–कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप–केवीके), रामगढ़ ने 15–29 जून, 2026 के दौरान "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) पर आयोजित 15 दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया।
इस कार्यक्रम के तहत रामगढ़, हजारीबाग, गिरिडीह और रांची जिलों के 40 कृषि आदान विक्रेताओं एवं ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें वैज्ञानिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित करना था, ताकि वे किसानों के लिए अग्रिम पंक्ति के तकनीकी सलाहकार के रूप में कार्य कर सकें। किसानों के पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी निर्णयों को प्रभावित करने में कृषि आदान विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, इस पहल का मुख्य उद्देश्य संतुलित, दक्ष एवं पर्यावरण-अनुकूल उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने हेतु उनकी तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना था।

व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक प्रदर्शन तथा क्षेत्र-आधारित शिक्षण के माध्यम से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम), 4आर पोषक तत्व प्रबंधन सिद्धांत (सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही स्थान), मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाएं, जैविक एवं अकार्बनिक पोषक स्रोतों का समेकित उपयोग, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्टिंग, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा कार्बनिक कार्बन में वृद्धि तथा जलवायु-अनुकूल पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय एवं आर्थिक दुष्प्रभावों तथा दीर्घकालिक मृदा उत्पादकता के लिए पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने के महत्व के प्रति भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश सुदृढ़ किया गया कि स्वस्थ मृदा खाद्य सुरक्षा, कृषि लाभप्रदता और जलवायु-अनुकूल कृषि की आधारशिला है। वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को परिवर्तन के वाहक के रूप में कार्य करने तथा वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों का व्यापक प्रसार करने और किसानों को मृदा परीक्षण आधारित एवं संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में से एक "मृदा स्वास्थ्य एवं पोषक तत्व प्रबंधन राजदूतों" के एक समर्पित समूह का निर्माण था। प्रशिक्षित प्रतिभागियों ने अपने-अपने जिलों में मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस पहल से क्षेत्र में अंतिम छोर तक कृषि विस्तार सेवाओं को सुदृढ़ करने, किसानों में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उर्वरक उपयोग दक्षता में सुधार करने, उत्पादन लागत कम करने, मृदा उर्वरता की बहाली, फसल उत्पादकता में वृद्धि तथा जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों के विकास में व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की अपेक्षा है।
इस प्रमुख कार्यक्रम के माध्यम से भाकृअनुप-आरसीईआर–केवीके रामगढ़, ने ग्रामीण हितधारकों को सशक्त बनाने, सतत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा उत्पादक, लाभकारी और पर्यावरणीय रूप से लचीली कृषि की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
(स्रोत: भाकृअनुप-पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना)







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