भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना में खेत बचाओ अभियान के तहत महिला किसानों ने सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने का लिया संकल्प

भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना में खेत बचाओ अभियान के तहत महिला किसानों ने सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने का लिया संकल्प

30 जून, 2026, पटना

खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर (भाकृअनुप-आरसीईआर), पटना ने आज पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड के कराई गांव में किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।

सभा को संबोधित करते हुए भाकृअनुप-आरसीईआर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए सतत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने किसानों से मृदा उर्वरता में सुधार, कृषि निवेश लागत कम करने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैविक खादों के उपयोग में वृद्धि, ढैंचा के माध्यम से हरित खाद अपनाने तथा मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेत को बचाने के लिए मिट्टी, जल एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य को बनाए रखना सर्वोच्च महत्व का विषय है। महिला किसानों को उनके पोषण, वर्षभर आय तथा जलवायु लचीलेपन के लिए विविधीकृत गृह-आधारित कृषि अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

Women Farmers Resolve to Adopt Sustainable and Climate-Resilient Farming Practices under Khet Bachao Abhiyan at ICAR-RCER, Patna

किसानों को एल नीनो से उत्पन्न संभावित जलवायु असामान्यताओं के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ने वाले प्रभाव तथा फसल उत्पादन पर उसके संभावित परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें मानसून की संभावित कमी के प्रभावों को कम करने के लिए उपयुक्त जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियां अपनाने की सलाह दी गई, जिनमें डायरेक्ट-सीडेड राइस (डीएसआर), अल्पावधि एवं जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों की खेती, जल का कुशल प्रबंधन, समय पर फसल स्थापना तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन शामिल हैं। अनियमित वर्षा से निपटने के लिए आकस्मिक योजना (कंटिजेंसी प्लानिंग) तथा स्थान-विशिष्ट वैज्ञानिक अनुशंसाओं को अपनाने के महत्व पर भी बल दिया गया।

संवादात्मक सत्र के दौरान प्रगतिशील महिला किसान गीता देवी ने बताया कि खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत आयोजित पूर्व बैठकों के बाद उन्होंने अपने खेत में ढैंचा एवं मूंग को शामिल किया है। उन्होंने अन्य किसानों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया। किसानों ने चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी की तथा सामूहिक रूप से सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का समापन कृषि भूमि की रक्षा करने, मृदा एवं जल संसाधनों का संरक्षण करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा एवं एक लचीले कृषि भविष्य को सुनिश्चित करने हेतु पर्यावरणीय रूप से सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की सामूहिक शपथ के साथ हुआ।

कार्यक्रम में कुल 141 किसानों, जिनमें 95 महिला किसान शामिल थीं, ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना)

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