16 जुलाई, 2026, कोलकाता
भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता ने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल में स्थित अपने 59 कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के नेटवर्क के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) का 98वां स्थापना दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया तथा विज्ञान-आधारित, जलवायु-सहिष्णु और किसान-केन्द्रित कृषि को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
समारोह की शुरुआत भाकृअनुप मुख्यालय, नई दिल्ली से आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम के लाइव वेबकास्ट से हुई। इस वेबकास्ट में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता के साथ-साथ वैज्ञानिकों, तकनीकी, प्रशासनिक एवं सहायक कर्मचारियों, अनुसंधान सहयोगियों और यंग प्रोफेशनल्स ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, जोन-V के अंतर्गत आने वाले कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के प्रमुखों एवं कर्मचारियों ने भी इसमें सहभागिता की।
समारोह को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भाकृअनुप को भारत के कृषि परिवर्तन की प्रेरक शक्ति बताया और वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अनुसंधान को किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाते हुए प्रयोगशालाओं से किसानों के खेतों तक प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को तेज करें।

इस अवसर पर डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, ने पिछले वर्ष के दौरान परिषद की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिनमें 386 उन्नत फसल किस्मों का विकास शामिल है, जिनमें से 94 प्रतिशत जलवायु-सहिष्णु हैं, तथा 117 बागवानी किस्मों का विकास किया गया है। इसके अलावा पशु स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, कृषि यंत्रीकरण और जलवायु-स्मार्ट कृषि के क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण प्रगति की गई है।
इस अवसर को स्मरणीय बनाने के लिए भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता और इसके 59 कृषि विज्ञान केन्द्रों ने पूरे क्षेत्र में किसान-केन्द्रित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की। इन गतिविधियों में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, कृषि आदानों का वितरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं स्वच्छ रोपण सामग्री उत्पादन, प्राकृतिक खेती, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, द्वितीयक कृषि एवं कृषि उद्यमिता के माध्यम से फसल विविधीकरण, एल नीनो आकस्मिकता योजना तथा वृक्षारोपण गतिविधियों पर तकनीकी सत्र शामिल थे। सफल छोटे एवं सीमांत किसानों, महिला किसानों तथा कृषि उद्यमियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया, जबकि किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रमों ने क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों के समाधान और प्रमाणित कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया।
लाइव वेबकास्ट और पूरे दिन चले समारोहों में कुल 3,321 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें 2,981 किसान तथा 340 गणमान्य व्यक्ति/वैज्ञानिक/अधिकारी शामिल थे। यह पूर्वी भारत में भाकृअनुप की विस्तार प्रणाली की मजबूत पहुंच को दर्शाता है।

समारोह में हरित आयाम जोड़ते हुए, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता और जोन-V के कृषि विज्ञान केन्द्रों ने राष्ट्रव्यापी अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अंतर्गत अपने कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस अभियान में निदेशक, वैज्ञानिकों, वित्त एवं प्रशासनिक कर्मियों तथा परियोजना कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और हरित भविष्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।
इन समारोहों ने कृषि प्रौद्योगिकियों की अंतिम छोर तक पहुंच को सुदृढ़ करने, नवाचार के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने तथा जलवायु-सहिष्णु, समावेशी और सतत कृषि के माध्यम से विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में सार्थक योगदान देने के लिए आईसीएआर–अटारी, कोलकाता और उसके केवीके नेटवर्क के सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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