23-24 मार्च, 2026, नरेन्द्रपुर
सस्य श्यामला कृषि विज्ञान केन्द्र (आरकेएमवीईआरआई), नरेन्द्रपुर द्वारा जादवपुर विश्वविद्यालय के प्राकृतिक उत्पाद अध्ययन प्रभाग के सहयोग से “औषधीय पौधों का हस्तक्षेप, खेती एवं फॉर्म्युलेशन विकास” विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी भूमि सुपोषण एवं संरक्षण जन अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य और सतत खेती के विषयों को समाहित किया गया।
23 मार्च को आयोजित उद्घाटन सत्र में जादवपुर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ नेचुरल प्रोडक्ट स्टडीज के निदेशक पल्लब कांति हालदार, सस्य श्यामला केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख स्वगत घोष, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के संयुक्त निदेशक एवं एमेरिटस वैज्ञानिक (सेवानिवृत्त) सलील कुमार गुप्ता तथा सुभामी बायोफार्मा (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक एवं निदेशक सुभालक्ष्मी घोष उपस्थित रहे।

समापन सत्र में डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-आटारी, कोलकाता, ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती भूमि सुपोषण एवं संरक्षण जन अभियान के उद्देश्यों की पूर्ति का एक प्रभावी माध्यम है। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, भूमि का सतत उपयोग तथा किसानों की आय और आजीविका सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि कम लागत वाली और जलवायु अनुकूल औषधीय फसलें मृदा उर्वरता बढ़ाती हैं, रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करती हैं तथा अनुपजाऊ एवं क्षतिग्रस्त भूमि का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करती हैं। साथ ही यह जैव विविधता संरक्षण में भी सहायक हैं।
तकनीकी सत्रों में औषधीय पौधों से संबंधित सरकारी हस्तक्षेप, वैज्ञानिक खेती पद्धतियां, कीट एवं रोग प्रबंधन, औद्योगिक संभावनाएं तथा फॉर्म्युलेशन विकास पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए उन्नत कृषि पैकेज की जानकारी दी गई।
भूमि सुपोषण एवं संरक्षण जन अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप कार्यक्रम में मृदा उर्वरता संवर्धन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व को रेखांकित किया गया।

समापन सत्र में डॉ. प्रदीप डे तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किसानों और हितधारकों के बीच औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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