20 जून 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भाकृअनुसं, नई दिल्ली, में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 23वीं किस्त के अवसर पर प्रसारण कार्यक्रम एवं किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से हस्तांतरण किया गया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और सहकारिता क्षेत्र के समन्वित विकास से ही कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण तथा उनके समग्र कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और आयुष्मान भारत सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का विस्तार राज्य में किया जा रहा है, जिससे लाखों किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल हानि से सुरक्षा प्राप्त होगी। इसके साथ ही किसानों के अभिलेखों के डिजिटलीकरण तथा डिजिटल कृषि मिशन के अंतर्गत एग्रीस्टैक जैसी पहलों के माध्यम से किसानों को ऋण, बीमा, उर्वरक तथा अन्य सेवाओं तक सरल और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, संस्थागत ऋण की उपलब्धता तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मिशन मोड में संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है। मोदी जी ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ मृदा ही समृद्ध कृषि की आधारशिला है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि मिट्टी में जीवन को बनाए रखना और ‘धरती मां’ का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

भाकृअनुप.-भाकृअनुसं, नई दिल्ली में सीधा-प्रसारण कार्यक्रम एवं किसान संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. मनसुख मांडविया, केन्द्रीय मंत्री, श्रम व रोजगार एवं युवा कार्य व खेल, ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी किसानों की समृद्धि, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए अनेक योजनाओं का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “समय और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, इसलिए नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाना आवश्यक है।” उनके अनुसार, “जिस प्रकार एक मां अपने बच्चों की देखभाल करती है, उसी प्रकार धरती मां किसानों का पालन-पोषण करती है, इसलिए हमें अपनी भूमि का सम्मान करना चाहिए और उसकी रक्षा करनी चाहिए।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेती को अधिक टिकाऊ, और लाभकारी बनाया जा सकता है। डॉ. मांडविया ने ई-नाम, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों तथा नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।
भाकृअनुप-भाकृअनुसं के कृषि विज्ञान केन्द्र शिकोहपुर, गुरुग्राम कार्यक्रम में श्री कृष्ण पाल गुर्जर, केन्द्रीय केबिनेट राज्य मंत्री (सहकारिता), भारत सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन कर रही है जिससे कि किसानों की आय को बढ़ाया जा सके और किसानों के जीवन को और भी सुखमय बनाया जा सके।

भाकृअनुप-भाकृअनुसं, नई दिल्ली में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ गांवों और किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है तथा किसानों को जागरूक और प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभियान किसानों के हित के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक कृषि रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर भाकृअनुप-भाकृअनुसं, नई दिल्ली, को बधाई देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों से भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, संयुक्त निदेशक, परियोजना निदेशक, किसानों, वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों तथा संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर किसानों के लिए तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने समेकित कृषि प्रणाली, बाजरा उत्पादन प्रौद्योगिकी, उन्नत सब्जी उत्पादन, बीज उत्पादन, खरीफ फसलों में समेकित कीट प्रबंधन, रोग प्रबंधन, फल उत्पादन प्रौद्योगिकी तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए। इन सत्रों के माध्यम से किसानों को नवीन वैज्ञानिक तकनीकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की जानकारी प्रदान की गई।
(स्रोतः भाकृअनप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली)







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