भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान द्वारा कर्नाटक के लिए प्रमुख दलहनी फसलों की उन्नत तकनीकों के प्रसार हेतु प्री-खरीफ बैठक का आयोजन

भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान द्वारा कर्नाटक के लिए प्रमुख दलहनी फसलों की उन्नत तकनीकों के प्रसार हेतु प्री-खरीफ बैठक का आयोजन

30 अप्रैल, 2026

भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर एवं भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु तथा कर्नाटक राज्य कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आज कर्नाटक राज्य के लिए प्रमुख दलहनी फसलों की उन्नत तकनीकों के प्रसार हेतु प्री-खरीफ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई।

बैठक में डॉ. गिरीश प्रसाद दीक्षित, डॉ. रंजय सिंह, डॉ. वी. वेंकट सुब्रमण्यम, डॉ. मधुसूदन सहित भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान धारवाड़ क्षेत्रीय केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रभारी एवं वैज्ञानिक, कृषि उपनिदेशक, संयुक्त कृषि निदेशक तथा कर्नाटक के विभिन्न जिलों के कृषि अधिकारियों ने भाग लिया।

Pre-Kharif meeting on Pulses for Dissemination of Improved technologies for major pulse crops in convergence mode for Karnataka State

डॉ गिरीश प्रसाद दीक्षित ने देश में दलहन उत्पादन की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कर्नाटक के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के लिए जिला-स्तरीय क्लस्टर आधारित रणनीति, क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने राज्य में अरहर फसल के महत्व को रेखांकित करते हुए हाल ही में जारी उच्च उत्पादक किस्मों को अपनाने तथा विल्ट रोग के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता बताई।

Pre-Kharif meeting on Pulses for Dissemination of Improved technologies for major pulse crops in convergence mode for Karnataka State

डॉ रणजय सिंह ने उन्नत दलहन किस्मों तथा तकनीकों के प्रभावी प्रसार के लिए प्री-खरीफ बैठकों के आयोजन की सराहना की। उन्होंने प्रदर्शन आधारित तकनीक हस्तांतरण में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका पर बल दिया तथा इन गतिविधियों को वार्षिक योजनाओं में शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने अरहर में विल्ट रोग से निपटने के लिए बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने, नई किस्मों के उपयोग तथा तकनीकी प्रसार हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता पर जोर दिया।

Pre-Kharif meeting on Pulses for Dissemination of Improved technologies for major pulse crops in convergence mode for Karnataka State

डॉ. वी. वेंकट सुब्रमण्यम  ने दलहनी फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग एवं समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और अनुकूलन रणनीतियों की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित किया। साथ ही गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिक वित्तीय सहयोग की आवश्यकता बताई।

Pre-Kharif meeting on Pulses for Dissemination of Improved technologies for major pulse crops in convergence mode for Karnataka State

डॉ. वी. वेंकट सुब्रमण्यम ने बताया कि कर्नाटक में 34.50 लाख हैक्टर क्षेत्र में दलहनी फसलें उगाई जाती हैं और उत्पादन 19.0 मिलियन टन है, लेकिन उन्नत किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीजों की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने नई किस्मों के प्रसार और खरीद के लिए सहयोग का अनुरोध किया तथा राष्ट्रीय दलहन मिशन के अंतर्गत मिनी किट वितरण कार्यक्रम की जानकारी दी।

वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रस्तुतियों के बाद हुई चर्चा में नई किस्मों एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, जैव-कीटनाशकों, सूखा शमन रणनीतियों, रोग एवं खरपतवार प्रबंधन तथा उन्नत मूंग किस्मों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

Pre-Kharif meeting on Pulses for Dissemination of Improved technologies for major pulse crops in convergence mode for Karnataka State

प्रतिभागियों ने स्पष्ट सीएफएलडी दिशा-निर्देश, पौध संरक्षण गतिविधियों को मजबूत करने, बीज हब की निगरानी तथा नियमित प्री-सीजन बैठकों के आयोजन की आवश्यकता भी रेखांकित की।

ऑनलाइन बैठक में कुल 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान)

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