भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में मृदा–पादप–मानव श्रृंखला में प्रदूषकों पर शीतकालीन विद्यालय का समापन

भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली में मृदा–पादप–मानव श्रृंखला में प्रदूषकों पर शीतकालीन विद्यालय का समापन

16 मार्च, 2026, नई दिल्ली

भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन प्रभाग द्वारा ‘मृदा–पादप–मानव श्रृंखला में प्रदूषकों के आकलन एवं प्रबंधन हेतु उन्नत उपकरण एवं तकनीक’ विषय पर 24 फरवरी से 16 मार्च, 2026 तक 21 दिवसीय शीतकालीन विद्यालय का सफल आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (एसएयू), भाकृअनुप संस्थानों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के 25 प्रतिभागियों ने शिरकत की।

उद्घाटन सत्र में डॉ. ए.के. नायक ने मृदा–पादप–मानव श्रृंखला में प्रदूषकों की निगरानी एवं प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के बढ़ते महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय प्रदूषण की जटिलता को देखते हुए उन्नत तकनीकी, अंतःविषयक अनुसंधान तथा कुशल मानव संसाधनों की आवश्यकता है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों, कृषि उत्पादकता, खाद्य गुणवत्ता एवं मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

ICAR-IARI, New Delhi Concludes Winter School on Pollutants in Soil–Plant–Human Continuum

इस शीतकालीन विद्यालय का उद्देश्य मृदा–पादप–मानव श्रृंखला में प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों एवं पेशेवरों की तकनीकी एवं वैज्ञानिक क्षमता को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम में प्रदूषकों के स्रोत, व्यवहार, आकलन एवं प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया, जो मृदा गुणवत्ता, फसल सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता एवं मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, संवादात्मक तकनीकी सत्रों एवं अंतःविषयक अनुभव प्रदान किया गया, जिससे उन्हें प्रदूषण आकलन की आधुनिक विधियों एवं उनके प्रभावों की गहन समझ प्राप्त हुई।

समापन सत्र में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप–आईएआरआई ने इस प्रासंगिक एवं समयोचित प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की तथा प्रतिभागियों को सक्रिय भागीदारी के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि कृषि प्रणालियों में प्रदूषण से जुड़े मुद्दों के समाधान हेतु समेकित एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ मजबूत विश्लेषणात्मक क्षमता एवं क्षेत्र-आधारित प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता है।

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डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव ने इस प्रकार के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे शोधकर्ताओं एवं पेशेवरों को नवीनतम ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्राप्त हो सके और वे उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी समाधान कर सकें।

यह शीतकालीन विद्यालय सकारात्मक रूप से संपन्न हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने कृषि एवं पर्यावरणीय प्रणालियों में प्रदूषकों के आकलन एवं प्रबंधन की उन्नत विधियों का सैद्धांतिक ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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