भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने आईसीआईसीआई फाउंडेशन के सहयोग से उन्नत स्पीड ब्रीडिंग सुविधा की कि स्थापना

भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने आईसीआईसीआई फाउंडेशन के सहयोग से उन्नत स्पीड ब्रीडिंग सुविधा की कि स्थापना

6 मई, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, ने आईसीआईसीआई फाउंडेशन के सहयोग से फाउंडेशन की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के अंतर्गत अत्याधुनिक स्पीड ब्रीडिंग सुविधा की स्थापना की है। यह उन्नत सुविधा नियंत्रित पर्यावरणीय परिस्थितियों के माध्यम से तिलहनी फसलों में तीव्र पुष्पन एवं पौध विकास को प्रोत्साहित कर फसल सुधार कार्यक्रमों को गति प्रदान करने के लिए विकसित की गई है। इससे पीढ़ी अवधि में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा तेजी से प्रजनन चक्र संभव हो सकेगा।

ICAR-IIOR, Hyderabad Establishes Advanced Speed Breeding Facility with Support from ICICI Foundation

इस सुविधा का उद्घाटन डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप; डॉ. आर.के. माथुर, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान; डॉ. गोपाल सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट; डॉ. आर.एम. सुंदरम, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान; तथा डॉ. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय श्रीअन्न अनुसंधान संस्थान सहित हैदराबाद स्थित विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों एवं क्षेत्रीय केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आईसीआईसीआई फाउंडेशन तथा आईसीआईसीआई बैंक के प्रतिनिधियों ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लिया।

ICAR-IIOR, Hyderabad Establishes Advanced Speed Breeding Facility with Support from ICICI Foundation

यह स्पीड ब्रीडिंग सुविधा तिलहनी फसलों की अधिदेशित फसलों में उन्नत किस्मों के विकास को तीव्र गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे उत्पादकता वृद्धि, जलवायु सहनशीलता तथा पोषण सुरक्षा को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

यह पहल कृषि अनुसंधान संस्थानों एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व प्रयासों के बीच मजबूत साझेदारी को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य सतत कृषि विकास को आगे बढ़ाना तथा खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय मिशन को समर्थन प्रदान करना है।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान)

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