10 जून, जबलपुर
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुंडम ब्लॉक के जनजातीय बहुल गांव पड़रिया में आज "खेत बचाओ अभियान एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग" विषय पर एक जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 17 महिला किसानों (महिला किसान) सहित कुल 42 किसानों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

डॉ. पी.के. मुखर्जी, प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप-डीडब्ल्यूआर, ने आगामी मानसून मौसम पर एल नीनो के संभावित प्रभाव तथा कृषि उत्पादन पर उसके संभावित परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अनिश्चित वर्षा परिस्थितियों में सफल फसल उत्पादन हेतु विभिन्न जलवायु-सहिष्णु रणनीतियों पर चर्चा की, जिनमें प्रत्यक्ष बीजित धान (डीएसआर), इन-सीटू नमी संरक्षण पद्धतियां, उर्वरकों विशेषकर यूरिया और डीएपी का संतुलित उपयोग तथा लंबे शुष्क अंतराल के दौरान स्प्रिंकलर के माध्यम से अनुपूरक सिंचाई शामिल थीं। उर्वरक उपयोग दक्षता में सुधार, मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर विशेष बल दिया गया।
डॉ. मुखर्जी ने संकर मक्का की खेती की पद्धतियों पर भी विस्तृत व्याख्यान दिया, जिसमें उन्नत फसल स्थापना, पोषक तत्व प्रबंधन तथा खरपतवार नियंत्रण उपायों को शामिल किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागी किसानों को आवश्यक आदानों के रूप में संकर मक्का बीज (किस्म: डीकेसी 9126) तथा खरपतवारनाशी एट्राजीन और टोपरामेजोन वितरित किए गए। प्रभावी एवं सुरक्षित खरपतवार प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए खरपतवारनाशी के उपयोग के तकनीकी पहलुओं, जिनमें अनुशंसित मात्रा, उपयोग का समय, प्रयोग की विधि तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियां शामिल थीं, की विस्तार से जानकारी दी गई।

किसानों ने चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया, अपने खेतों के अनुभव साझा किए तथा अनुशंसित जलवायु-स्मार्ट एवं वैज्ञानिक फसल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने में रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर)







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