भाकृअनुप–डीएमएपीआर, आनंद (गुजरात) में उद्योग बैठक एवं स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन

भाकृअनुप–डीएमएपीआर, आनंद (गुजरात) में उद्योग बैठक एवं स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन

24 मार्च, 2026, गुजरात

भाकृअनुप–औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय (डीएमएपीआर), आनंद, गुजरात द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों (एमएपी) के क्षेत्र में संस्थान–उद्योग समन्वय को सुदृढ़ करने तथा स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय इंडस्ट्री मीट एवं स्टार्टअप कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया।

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. के.बी. कथीरिया, पूर्व कुलपति, आनंद कृषि विश्वविद्यालय (एएयू), आनंद, गुजरात ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अमित व्यास, प्रबंध निदेशक, अमूल, आनंद उपस्थित रहे।

Industry Meet and Start-up Conclave 2026 Organised at ICAR-DMAPR, Anand, Gujarat

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. अनिल कुमार दुबे, निदेशक, सरदार पटेल अक्षय ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (एसपीआरईआरआई), वल्लभ विद्यानगर; डॉ. एस.एस. कलामकर, निदेशक, एग्रो-इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर (एईआरसी), एसपी यूनिवर्सिटी, वल्लभ विद्यानगर; डॉ. बिमल कुमार भट्टाचार्य, समूह निदेशक, इसरो-स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एसएसी), अहमदाबाद; तथा डॉ. सस्वता नारायण बिस्वास, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आणंद (आईआरएमए), आनंद शामिल हुआ।

विशेष अतिथियों के रूप में डॉ. हार्दिक सोनी, सहायक महाप्रबंधक, वासु हेल्थकेयर प्रा.लि., वडोदरा; डॉ. भागीरथ चौधरी, संस्थापक निदेशक, साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी), नई दिल्ली; तथा डॉ. आर.ओ. गुप्ता, वरिष्ठ महाप्रबंधक, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), आनंद, ने सहभागिता की।

डॉ. मनीष दास, निदेशक, भाकृअनुप-डीएमएपीआर, आनंद, ने निदेशालय की प्रमुख उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए औषधीय एवं सुगंधित पौधों के लिए मूल्य श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. हार्दिक सोनी ने आयुर्वेद उद्योग में एमएपी की अपेक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता के कारण वैश्विक मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है।

Industry Meet and Start-up Conclave 2026 Organised at ICAR-DMAPR, Anand, Gujarat

डॉ. भागीरथ चौधरी ने इसबगोल उद्योग की संभावनाओं पर जोर दिया तथा भाकृअनुप-डीएमएपीआर में अमूल के सहयोग से एमएपी नवाचार केन्द्र स्थापित करने का सुझाव दिया, क्योंकि एमएपी न्यूट्रास्यूटिकल्स तथा फंक्शनल फूड्स के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. आर.ओ. गुप्ता ने हर्बल पौधों के उपयोग से एथनोवेटरनरी अनुप्रयोगों के विकास में उद्यमिता के अवसरों पर प्रकाश डाला तथा पशुधन में एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) और दूध में अवशेषों से संबंधित चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। डॉ. अनिल कुमार दुबे ने औषधीय पौधों के उत्पादन और प्रसंस्करण में लागत प्रभाविता हेतु ऊर्जा-कुशल प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया।

डॉ. एस.एस. कलामकर ने एमओ के उत्पादन तथा विपणन के लिए वस्तु-विशिष्ट सूचना पुस्तिकाओं के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. बिमल कुमार भट्टाचार्य ने सटीक कृषि में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए स्थल उपयुक्तता आकलन के महत्व को बताया।

डॉ. सस्वता नारायण बिस्वास ने एमएपी के ब्रांडिंग और मूल्य श्रृंखला विकास की आवश्यकता पर जोर दिया और इसे आजीविका सुरक्षा एवं ग्रामीण विकास से जोड़ा। डॉ. अमित व्यास ने अमूल मॉडल के आर्थिक विकास पर प्रकाश डालते हुए औषधीय पौधों से मूल्य वर्धित उत्पादों की संभावनाओं को रेखांकित किया तथा स्वास्थ्य संरक्षण, विरासत की रक्षा और सतत आजीविका सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने संबोधन में डॉ. के.बी. कथीरिया ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों में व्यवसाय विकास की व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुजरात इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

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इस अवसर पर चार प्रकाशनों—टेक्नोलॉजी बुलेटिन (एआईसीआरपी-एमएपी एवं बी), औषधीय एवं सुगंधित पौधों की कीट सूची, भाकृअनुप-डीएमएपीआर न्यूज़लेटर तथा एचपीएलसी आधारित गुणवत्ता विश्लेषण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ—का विमोचन किया गया। साथ ही, एमएपी में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए चरोटर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएचएआरयूएसएटी), चांगा तथा सरदार पटेल अक्षय ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (एसपीआरईआरआी ), वल्लभ विद्यानगर के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया।

कॉन्क्लेव में “स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए औषधीय एवं सुगंधित पौधे” तथा “एमएपी में इन्क्यूबेशन और व्यवसाय विकास” विषयों पर दो पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं, जिनमें 25 पैनलिस्टों ने भाग लिया। कुल 25 स्टार्ट-अप्स ने अपने नवाचारों और उत्पादों का प्रदर्शन किया।

इस कार्यक्रम में उद्योग, स्टार्ट-अप्स, उद्यमी, किसान, शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, गुजरात स्थित भाकृअनुप संस्थानों के प्रमुख, मीडिया तथा अन्य हितधारकों सहित कुल 239 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय, आणंद, गुजरात)

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