22 अक्टूबर, 2026, पुणे
भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने आज “भारत में गुलाब प्रजनन की स्थिति: चुनौतियां और अवसर” पर एक वर्चुअल विचार-मंथन सत्र आयोजित किया। इस सत्र में वैज्ञानिकों, गुलाब प्रजनकों, किसानों और पुष्पकृषि उद्योग के हितधारकों ने भारत में गुलाब प्रजनन की वर्तमान स्थिति, उभरते बाजार रुझानों, प्रजनन संबंधी चुनौतियों, बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर), किस्म मूल्यांकन तथा व्यावसायीकरण के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
डॉ. के.वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे, ने स्वागत संबोधन दिया और भारत में गुलाब प्रजनन की स्थिति का अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने घरेलू प्रजनन क्षमताओं को मजबूत करने और वाणिज्यिक कट-फ्लावर उत्पादन को समर्थन देने के लिए भारत में प्रजनित गुलाब की किस्मों को विकसित और बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उद्योग के हितधारकों के बीच आईपीआर प्रावधानों, किस्म संरक्षण और पुष्पकृषि क्षेत्र पर उनके प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
“भारत में गुलाब प्रजनन: चुनौतियां और अवसर” पर तकनीकी प्रस्तुति में देश में गुलाब प्रजनन की प्रगति की समीक्षा की गई और वाणिज्यिक खेती के लिए उन्नत गुलाब किस्मों को विकसित करने हेतु की गई पहलों पर प्रकाश डाला गया। प्रस्तुति में उद्योग की आवश्यकताओं और विकसित होती घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार प्राथमिकताओं को पूरा करने वाली किस्मों को विकसित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया। कम अवधि में ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए गुलाब में बीज अंकुरण को तेज करने के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
संरक्षित खेती के तहत गुलाब प्रजनन और किस्म मूल्यांकन के अनुभव साझा किए गए तथा वांछनीय पुष्प गुणवत्ता, तने की लंबाई, फूलदान जीवन और अन्य व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण गुणों वाले आशाजनक जीनोटाइप की पहचान के लिए संरक्षित परिस्थितियों में गुलाब की किस्मों के व्यवस्थित मूल्यांकन के महत्व पर जोर दिया गया। ऐसे मूल्यांकन वाणिज्यिक कट-फ्लावर उत्पादन के लिए उपयुक्त किस्मों की पहचान करने और बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।

किसानों की खेत परिस्थितियों में गुलाब की किस्मों के मूल्यांकन और उनके प्रदर्शन का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण करने के महत्व पर भी जोर दिया गया, ताकि उनकी व्यावहारिक क्षमता का आकलन किया जा सके। प्रभावी और परिणामोन्मुखी प्रजनन एवं मूल्यांकन कार्यक्रम सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों को पर्याप्त वैज्ञानिक जनशक्ति और आवश्यक बुनियादी ढांचे से मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
उद्योग के प्रतिनिधियों ने गुलाब की खेती, किस्म संबंधी प्राथमिकताओं, बाजार की मांग और व्यावसायीकरण पर अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा किए। विचार-विमर्श में स्वदेशी गुलाब प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत करने, बाजारोन्मुखी किस्मों को विकसित करने, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग में सुधार करने तथा आईपीआर और किस्म संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने आशाजनक किस्मों की वाणिज्यिक उत्पादन के लिए उपयुक्तता स्थापित करने हेतु संरक्षित खेती और किसानों की खेत परिस्थितियों, दोनों में उनके मूल्यांकन के महत्व पर भी जोर दिया।
विचार-मंथन सत्र ने शोधकर्ताओं और उद्योग के हितधारकों के बीच सार्थक संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया और भारतीय गुलाब प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत में प्रजनित गुलाब की किस्मों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के अवसरों की पहचान की।
सत्र में उद्योग के प्रतिनिधियों, किसानों, आईसीएआर-डीएफआर, पुणे के वैज्ञानिकों और पुष्पकृषि पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपी) से जुड़े वैज्ञानिकों सहित कुल 57 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे)








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