5 जून, 2026, पुणे
भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने कृषि महाविद्यालय, पुणे तथा महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग के सहयोग से पुणे जिले के दौंड तालुका के सहजपुर गांव में “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम श्रीमती काजल म्हेत्रे, सरपंच, ग्राम पंचायत सहजपुर तथा डॉ. सुभाष भालेकर, एसोसिएट डीन, कृषि महाविद्यालय, पुणे, की उपस्थिति में आयोजित किया गया। जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच सतत मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
प्रतिभागियों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और उसके लाभों के प्रति जागरूक किया गया, जिसमें पौष्टिक खाद्य उत्पादन सुनिश्चित करते हुए कृषि लाभप्रदता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। किसानों को प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए प्रतिनिधि मृदा नमूनों के उचित संग्रहण के संबंध में शिक्षित करने हेतु वैज्ञानिक मृदा नमूना संग्रहण तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड की व्याख्या तथा फसल उत्पादकता और पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार के लिए मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं को अपनाने के महत्व के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया। इसके अतिरिक्त, खड़ी फसलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों की पहचान पर क्षेत्र-स्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिससे किसान पोषक तत्वों से संबंधित समस्याओं को समय रहते बेहतर ढंग से पहचानने और उनका समाधान करने में सक्षम हो सकें।

तकनीकी सत्रों में संतुलित उर्वरक प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा उर्वरकों के विवेकपूर्ण और स्थान-विशिष्ट पोषक तत्व अनुप्रयोग पर बल दिया गया। किसानों को कृषि क्षेत्र के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान की गई।
मृदा उर्वरता बढ़ाने, मृदा में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा में सुधार करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में हरित खाद की भूमिका पर विशेष बल दिया गया। जैव उर्वरकों तथा अन्य जैविक मृदा संशोधकों सहित जैव-आदानों के लाभों पर भी चर्चा की गई, जिन्हें मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को समर्थन देने के लिए सतत उपायों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसके दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रश्न पूछे। प्रतिभागियों को सतत मृदा स्वास्थ्य, बेहतर फसल उत्पादकता तथा दीर्घकालिक कृषि लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में कुल 53 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 39 पुरुष और 14 महिलाएं शामिल थीं।
(स्रोत: भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे)







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