भाकृअनुप-पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों में लैंगिक दृष्टिकोणों को मुख्यधारा में शामिल करने के प्रति वैज्ञानिक कर्मचारियों को संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से लैंगिक उत्तरदायी पुष्पकृषि अनुसंधान एवं विस्तार पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला में भाकृअनुप के लैंगिक नीति के उद्देश्यों और समय-सीमा की समीक्षा की गई, साथ ही संस्थागत कार्यक्रमों में लैंगिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने के लिए नवाचारी दृष्टिकोणों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने पुष्पकृषि में महिलाओं और पुरुषों की भूमिकाओं तथा उनकी भागीदारी का विश्लेषण किया और भविष्य की रणनीतियों के मार्गदर्शन के लिए लिंग-विभाजित आंकड़ों की आवश्यकता पर बल दिया।

लैंगिक उत्तरदायी अनुसंधान पद्धतियों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं, जिसके बाद प्रौद्योगिकियों का लैंगिक समावेशिता के दृष्टिकोण से मूल्यांकन करने पर एक व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। एक संरचित चेकलिस्ट का उपयोग करते हुए डीएफआर की मौजूदा प्रौद्योगिकियों का मूल्यांकन किया गया और परिणामों ने पुष्टि की कि संस्थान के नवाचार अत्यधिक लैंगिक-अनुकूल हैं, जो पुष्पकृषि अनुसंधान में लैंगिक पहलुओं को एकीकृत करने की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है।
कार्यशाला के दौरान डॉ. के.वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप-डीएफआर, उपस्थित रहे और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कार्यवाही की समीक्षा की। कार्यक्रम का समन्वय और आयोजन संस्थान के नोडल अधिकारियों (जीआरए) द्वारा किया गया।
यह पहल पुष्पकृषि अनुसंधान और विस्तार में लैंगिक संवेदनशीलता को समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि तकनीकी प्रगति का लाभ सभी हितधारकों को समान रूप से प्राप्त हो।
(स्रोत: भाकृअनुप-पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे)







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