भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे द्वारा उन्नत आनुवंशिक अनुसंधान हेतु ऐतिहासिक प्याज एसएसआर डेटाबेस का किया शुभारंभ

भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे द्वारा उन्नत आनुवंशिक अनुसंधान हेतु ऐतिहासिक प्याज एसएसआर डेटाबेस का किया शुभारंभ

27 मार्च, 2026, पुणे

भाकृअनुप–प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय (भाकृअनुप-डीओजीआर), पुणे, ने आज एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्याज एसएसआर डेटाबेस का सफलतापूर्वक उद्घाटन कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इस डेटाबेस का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. एस.के, सिंह, उप-महानिदेशक (उद्यानिकी विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा किया गया, जो प्याज की आनुवंशिकी एवं प्रजनन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. एस.के. सिंह ने उच्च उत्पादक, रोग-प्रतिरोधी तथा जलवायु-अनुकूल प्याज किस्मों के विकास में तेजी लाने के लिए आणविक उपकरणों को पारंपरिक प्रजनन तकनीकों के साथ एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया।

ICAR-DOGR, Pune Launches Landmark Onion SSR Database for Advanced Genetic Research

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ सुधाकर पांडे, सहायक महानिदेशक, एफवीएसएमएपी (उद्यानिकी विज्ञान) भी उपस्थित रहे। उन्होंने भविष्य के प्याज प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत बनाने तथा चयन की सटीकता बढ़ाने में इस डेटाबेस के प्रभावी उपयोग पर प्रकाश डाला।

स्वागत भाषण डॉ विजय महाजन, निदेशक, भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे, द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने उद्यानिकी अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे डिजिटल संसाधनों के विकास के महत्व को रेखांकित किया। डेटाबेस के प्रमुख डेवलपर ने इसके प्रमुख फीचर्स और विशेषताओं की प्रस्तुति भी दी।

यह अग्रणी पहल शोधकर्ताओं, प्रजनकों और अन्य हितधारकों के लिए एक समग्र एवं सुलभ संसाधन प्रदान करती है। सरल अनुक्रम दोहराएँ (एसएसआर) मार्कर अत्यंत उपयोगी आणविक उपकरण हैं, जिनका उपयोग आनुवंशिक विविधता विश्लेषण, किस्म पहचान तथा मार्कर-सहायता प्राप्त चयन में व्यापक रूप से किया जाता है। नव विकसित डेटाबेस में क्रोमोसोम-वार एसएसआर जानकारी, मोटिफ प्रकार, पॉलीमोरफ़िज्म स्थिति आदि शामिल हैं, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से आनुवंशिक डेटा तक पहुँच, विश्लेषण और उपयोग कर सकेंगे।

ICAR-DOGR, Pune Launches Landmark Onion SSR Database for Advanced Genetic Research

इस कार्यक्रम में विभिन्न भाकृअनुप संस्थानों के निदेशकों, प्याज प्रजनकों तथा भाकृअनुप-डीओजीआर, पुणे, के सभी कर्मचारियों ने ऑनलाइन सक्रिय भागीदारी की।

यह पहल भाकृअनुप-डीओजीआर की अनुसंधान अवसंरचना को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और इससे वैज्ञानिक समुदाय एवं किसानों को विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर प्याज किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की अपेक्षा है।

(स्रोत: भाकृअनुप–प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय, पुणे)

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