भाकृअनुप द्वारा ‘साधना सप्ताह’ के अंतर्गत ‘शासन में सुधार’ विषय पर वेबिनार का आयोजन

भाकृअनुप द्वारा ‘साधना सप्ताह’ के अंतर्गत ‘शासन में सुधार’ विषय पर वेबिनार का आयोजन

 6 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली

भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (नार्म), हैदराबाद, एवं भाकृअनुप मुख्यालय की मानव संसाधन प्रबंधन (एचआरएम) इकाई ने iGOT कर्मयोगी पहल के अंतर्गत चल रहे ‘साधना सप्ताह’ (2–8 अप्रैल, 2026) के अवसर पर ‘भाकृअनुप में शासन सुधार’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया।

इस वेबिनार का उद्देश्य राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं प्रसार प्रणाली (एनएआरईईएस) से जुड़े हितधारकों के बीच सतत अधिगम, क्षमता निर्माण और संस्थागत उत्कृष्टता की भावना को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में 2,700 से अधिक लॉगिन के माध्यम से 5,000 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें भाकृअनुप के कर्मचारी, केन्द्रीय एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा देशभर के कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रतिभागी शामिल थे।

Webinar on ‘Reforms in Governance’ under SADHANA Saptah Organised by ICAR

अपने मुख्य वक्तव्य में, डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने भाकृअनुप में प्रमुख शासन सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने सहभागितापूर्ण, पारदर्शी एवं नागरिक-केन्द्रित शासन पर बल दिया, जो ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने क्षेत्रीय स्टेशनों के पुनर्गठन, एमईएलआईए इकाई की स्थापना, भाकृअनुप अनुसंधान डेटा प्रबंधन नीति के कार्यान्वयन, संचार सुधार, लैंगिक समावेशन, संसाधन जुटाने तथा पेंशन के डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण कदमों का उल्लेख किया।

उन्होंने प्रशासनिक एवं शैक्षणिक सुधारों जैसे विकेन्द्रीकरण, करियर उन्नयन प्रक्रियाओं के सरलीकरण, नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप समन्वय, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, त्वरित किस्म विकास, स्वदेशी तकनीकों के संवर्धन तथा डेटा-आधारित एवं मांग-आधारित अनुसंधान पर भी प्रकाश डाला।

उद्घाटन संबोधन देते हुए, डॉ. जे.के. जेना, उप-महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान एवं कृषि शिक्षा), भाकृअनुप,  शासन में उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु नवाचार, सुधार एवं सतत अधिगम के महत्व को रेखांकित किया।

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अपने प्रारंभिक वक्तव्य में, डॉ. एस.के. शर्मा, सहायक महानिदेशक (एचआरएम), भाकृअनुप, एवं नोडल अधिकारी, iGOT, ने शासन प्रणाली को सुदृढ़ करने में क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास की आवश्यकता पर बल दिया। इस वेबिनार ने भाकृअनुप की पारदर्शी, कुशल, प्रौद्योगिकी-सक्षम एवं किसान-केन्द्रित शासन प्रणाली विकसित करने की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। साथ ही, उसने मिशन कर्मयोगी की भूमिका को भी रेखांकित किया, जो सरकारी कर्मचारियों में सतत अधिगम और पेशेवर विकास की संस्कृति को बढ़ावा देता है।

कार्यक्रम का समापन डॉ. गोपाल लाल द्वारा, निदेशक, भाकृअनुप-नार्म, धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की।

(स्रोत: कृषि शिक्षा प्रभाग, भाकृअनुप)

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