भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई और केवीके पिपराकोठी ने खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत संतुलित उर्वरीकरण एवं मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए मिलाया हाथ

भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई और केवीके पिपराकोठी ने खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत संतुलित उर्वरीकरण एवं मृदा स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए मिलाया हाथ

23 अक्टूबर, 2026, मोतिहारी, बिहार

भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार ने कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), पिपराकोठी के सहयोग से खेत बचाओ अभियान (केबीए) – रबी 2026 के तहत एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में 28 किसानों और प्रशिक्षुओं ने भाग लिया तथा इसमें संतुलित उर्वरक प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, कुशल पोषक तत्व प्रबंधन, फसल विविधीकरण और सतत कृषि पद्धतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में किसानों की समझ को मजबूत करना और फसल उत्पादकता बढ़ाने, अनावश्यक इनपुट लागत को कम करने तथा दीर्घकालिक मृदा उर्वरता बनाए रखने के लिए संसाधन-कुशल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना था।

डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप–एमजीआईएफआरआई, ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जैविक संसाधनों के पुनर्चक्रण और उन्नत फसल उत्पादन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से आत्मनिर्भर, जलवायु-अनुकूल और सतत कृषि प्रणालियां विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सतत कृषि उत्पादकता हासिल करने के लिए मृदा स्वास्थ्य बनाए रखना आवश्यक है और किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों को अपनाने, स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक संसाधनों को एकीकृत करने और मौजूदा फसल प्रणालियों में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने किसानों तक वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों और केवीके के बीच सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया।

कृषि अनुसंधान और खेत स्तर पर अपनाने के बीच अंतर को पाटने में केवीके की भूमिका पर प्रकाश डाला गया तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और उन्नत रबी फसल उत्पादन पद्धतियों पर जोर दिया गया। किसानों को कृषि लाभप्रदता और संसाधन उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए केवीके की सलाह और प्रशिक्षण अवसरों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

ICAR–MGIFRI and KVK Piprakothi Join Hands to Promote Balanced Fertilization and Soil Health under Khet Bachao Abhiyan 2026

मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरीकरण और सटीक नाइट्रोजन प्रबंधन पर एक तकनीकी सत्र में मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित पोषक तत्व सिफारिशों तथा रासायनिक उर्वरकों, जैविक खाद और जैव उर्वरकों के एकीकृत उपयोग पर जोर दिया गया। धान में नाइट्रोजन प्रबंधन के लिए ग्रीनसीकर आधारित फसल संवेदन प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन किया गया, जिसमें नाइट्रोजन उपयोग दक्षता में सुधार, उर्वरक लागत कम करने और पर्यावरणीय हानियों को न्यूनतम करने की इसकी क्षमता पर प्रकाश डाला गया।

धान–गेहूं प्रणाली में मूंग (हरा चना) को शामिल करके फसल विविधीकरण के महत्व पर भी चर्चा की गई। जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य में सुधार में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया। किसानों को स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों, फसल अवधि और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर उपयुक्त धान–गेहूं–मूंग फसल चक्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम में वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन को भी शामिल किया गया तथा मृदा कार्बनिक पदार्थ, लाभकारी सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्व चक्रण और पर्यावरणीय गुणवत्ता पर अवशेष जलाने के प्रतिकूल प्रभावों पर प्रकाश डाला गया। किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय अवशेषों को खेत में बनाए रखने, मल्चिंग, कम्पोस्टिंग, मिट्टी में मिलाने और उपयुक्त मशीनीकृत प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी गई। संरक्षण कृषि, जीरो-टिलेज और कुशल सिंचाई पद्धतियों के महत्व पर भी चर्चा की गई। एक संवादात्मक किसान–वैज्ञानिक सत्र में प्रतिभागियों को उर्वरक प्रयोग, मृदा उर्वरता, फसल स्थापना, अवशेष प्रबंधन और घटती लाभप्रदता से संबंधित खेत स्तर की चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर मिला। वैज्ञानिकों ने पोषक तत्व उपयोग दक्षता और सतत रबी फसल उत्पादन में सुधार के लिए व्यावहारिक, स्थान-विशिष्ट सिफारिशें प्रदान कीं।

संयुक्त पहल ने खेत बचाओ अभियान – रबी 2026 के तहत किसानों तक पहुंच को मजबूत करने और स्वस्थ मृदा, संतुलित उर्वरीकरण, सटीक पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और विविधीकृत फसल प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर–एमजीआईएफआरआई और केवीके पिपराकोठी की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। यह कार्यक्रम 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक निर्धारित संस्थान की चल रही अभियान गतिविधियों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बिहार में कृषि की सततता और किसानों की आजीविका में सुधार करना है।

(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)

×