भाकृअनुप–राष्ट्रीय ऑर्किड अनुसंधान केन्द्र, पाकयोंग, सिक्किम, द्वारा विकसित ऑर्किड ड्राई फ्लावर फ्रेम और रेज़िन आधारित ऑर्किड उत्पादों को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली। प्रधानमंत्री द्वारा नॉर्वे के प्रधानमंत्री श्री जोनास गार स्टोरे को भेंट किए गए ऑर्किड ड्राई फ्लावर फ्रेम और ऑर्किड पेपरवेट आईसीएआर-एनआरसीओ से प्राप्त किए गए थे।
प्रधानमंत्री की सिक्किम यात्रा के दौरान वास्तविक ऑर्किड पुष्पों से तैयार किए गए ड्राई फ्लावर फ्रेम और रेज़िन उत्पादों ने उनका विशेष ध्यान आकर्षित किया और उन्होंने इनकी सराहना की। इसके बाद सिक्किम के मुख्यमंत्री की इच्छा के अनुसार, इन उत्पादों की खरीद सिक्किम के मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से भाकृअनुप-एनआरसीओ से की गई। इसके प्रत्युत्तर में केंद्र ने अतिरिक्त ऑर्किड-आधारित उत्पाद तैयार किए, जिन्हें बाद में सिक्किम सरकार के मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजा गया।

ये उत्पाद भाकृअनुप-एनआरसीओ द्वारा मानकीकृत तकनीकों का उपयोग करते हुए तथा सिक्किम स्थित केन्द्र से प्राप्त प्राकृतिक रूप से संरक्षित ऑर्किड पुष्पों और फर्न पौधों से तैयार किए गए हैं। ये उत्पाद हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध ऑर्किड विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं।
भाकृअनुप-एनआरसीओ लंबे समय से ऑर्किड आधारित मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इनमें ड्राई फ्लावर फ्रेम, रेज़िन कला उत्पाद, ऑर्किड स्मृति-चिह्न (सॉवेनियर), ऑर्किड आभूषण तथा पुष्प संरक्षण तकनीकें शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य ऑर्किड संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना तथा किसानों और उद्यमियों के लिए अतिरिक्त आजीविका अवसर सृजित करना है।

केंद्र द्वारा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), महिला उद्यमियों, ऑर्किड उत्पादकों तथा ग्रामीण युवाओं के लिए ड्राई फ्लावर तकनीक और ऑर्किड मूल्य संवर्धन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उद्यमिता विकास और आजीविका संवर्धन को प्रोत्साहित करना है।
इन उत्पादों को मिली अंतरराष्ट्रीय सराहना संस्थान और सिक्किम राज्य दोनों के लिए गौरव का विषय है। प्रधानमंत्री द्वारा प्राप्त इस मान्यता से ऑर्किड संरक्षण, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता विकास तथा पूर्वोत्तर हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध पुष्पीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय ऑर्किड अनुसंधान केन्द्र, पाकयोंग, सिक्किम)







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