भाकृअनुप-एनबीएआईएम, मऊ ने खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत सतत कृषि के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों को दिया बढ़ावा

भाकृअनुप-एनबीएआईएम, मऊ ने खेत बचाओ अभियान 2026 के तहत सतत कृषि के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों को दिया बढ़ावा

18 जून, 2026, मऊ, उत्तर प्रदेश

देशव्यापी खेत बचाओ अभियान 2026 के अंतर्गत, भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव ब्यूरो (भाकृअनुप–एनबीएआईएम), मऊ, उत्तर प्रदेश ने मऊ जिले के परदहा ब्लॉक के मठिया गांव में लाभकारी सूक्ष्मजीवों के उपयोग के माध्यम से सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए एक किसान जागरूकता एवं विस्तार कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में मृदा उर्वरता बनाए रखने, फसल उत्पादकता बढ़ाने और पर्यावरणीय रूप से सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति समझ विकसित करना था। इस पहल में दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए जलवायु-लचीली और संसाधन-कुशल कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी बल दिया गया।

ICAR-NBAIM, Mau Promotes Beneficial Microorganisms for Sustainable Agriculture under Khet Bachao Abhiyan 2026

तकनीकी सत्रों के दौरान, भाकृअनुप-एनबीएआईएम के वैज्ञानिकों ने पोषक तत्वों के एकीकृत प्रबंधन, समय-समय पर मृदा परीक्षण तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसल प्रदर्शन में सुधार के लिए सूक्ष्मजीव-आधारित जैव-आदानों के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। किसानों को पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका के प्रति जागरूक किया गया।

विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत, सहभागी किसानों को आईसीएआर-एनबीएआईएम द्वारा विकसित फॉस्फेट-घुलनशील सूक्ष्मजीवी जैव-फॉर्मुलेशन ‘बायो-फॉस’ प्रदान किया गया। वैज्ञानिकों ने इसके उपयोग का प्रदर्शन किया और बताया कि यह फॉर्मुलेशन मृदा में उपस्थित फॉस्फोरस के अघुलनशील रूपों को पौधों के लिए उपलब्ध पोषक तत्वों में परिवर्तित करता है, जिससे फॉस्फोरस अवशोषण में सुधार होता है और सतत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।

इस कार्यक्रम में 40 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की, जिनमें 25 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल थे, जो सतत कृषि विकास के लिए पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने में कृषि समुदायों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय कृषि महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव ब्यूरो, मऊ, उत्तर प्रदेश)

×