भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने दो नई समुद्री प्रजातियों की पहचान की, भारत के समुद्री जैव विविधता अनुसंधान को मिली नई दिशा

भाकृअनुप-एनबीएफजीआर, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने दो नई समुद्री प्रजातियों की पहचान की, भारत के समुद्री जैव विविधता अनुसंधान को मिली नई दिशा

14 जुलाई, 2026, लखनऊ    

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (भाकृअनुप-एनबीएफजीआर), लखनऊ, के शोधकर्ताओं ने भारतीय समुद्री जलक्षेत्र से दो नई समुद्री प्रजातियों की खोज की है। इन खोजों में लक्षद्वीप के प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र से एक अत्यंत छोटी पोर्सिलेन केकड़ा प्रजाति तथा बंगाल की खाड़ी से एक नई स्नेक ईल प्रजाति शामिल है।

यह पोर्सिलेन केकड़ा केवल लगभग 3 मिमी आकार का है, जो इतनी छोटी है कि इसे उंगली के सिरे पर रखा जा सकता है। इस प्रजाति को लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप की प्रवाल भित्तियों से एकत्र किया गया। यह प्रजाति Pachycheles वंश से संबंधित है, जिसके सदस्य पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण तथा पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने के माध्यम से प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाते हैं। इस खोज को अंतरराष्ट्रीय सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका “ज़ूटाक्सा (Zootaxa)” में प्रकाशित किया गया है। शोध लेख का शीर्षक है “Pachycheles ravichandrani, a new species of porcelain crab from Lakshadweep, India (Crustacea: Decapoda: Porcellanidae).”

ICAR-NBFGR, Lucknow Scientists Identify Two New Marine Species, Advancing India’s Marine Biodiversity Research

इस नई प्रजाति का नाम Pachycheles ravichandrani भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन के सम्मान में रखा गया है। भारत के डीप ओशन मिशन के माध्यम से समुद्री जैव विविधता अन्वेषण को आगे बढ़ाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान एवं नेतृत्व को मान्यता देते हुए यह नामकरण किया गया। यह नई प्रजाति अपने कवच (कारापेस) की पार्श्वीय धारियों एवं पश्च किनारे पर सेटी (सूक्ष्म रोम) की उपस्थिति, छोटे चेलीपेड (पंजे) की उंगलियों के बीच स्पष्ट अंतराल तथा उसके काटने वाले किनारे के कटे हुए (ट्रंकेट) आकार जैसी विशिष्ट विशेषताओं के कारण अन्य प्रजातियों से अलग पहचानी जाती है।

दूसरी खोज बंगाल की खाड़ी से स्नेक ईल की एक नई प्रजाति की है, जिसका नाम Bascanichthys chepakakiensis रखा गया है। इस प्रजाति का नाम तेलुगु भाषा के शब्दों “चेपा”, जिसका अर्थ “मछली” है, तथा “काकी”, जो काकीनाडा का संक्षिप्त रूप है, से मिलकर बना है, जहां से इसका नमूना एकत्र किया गया था। इस नाम का सामूहिक अर्थ है “काकीनाडा की मछली”, जो स्थानीय भाषा तथा इस प्रजाति की भौगोलिक उत्पत्ति—दोनों को दर्शाता है। इस खोज को अंतरराष्ट्रीय सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका “जर्नल ऑफ इच्थियोलॉजी” में प्रकाशित किया गया है। शोध लेख का शीर्षक है “A New Snake Eel Species of Bascanichthys (Ophichthidae) from the Bay of Bengal Supported by Morphology and Mitochondrial Analysis.”

ICAR-NBFGR, Lucknow Scientists Identify Two New Marine Species, Advancing India’s Marine Biodiversity Research

नववर्णित इस ईल की पहचान कई विशिष्ट आकारिकीय विशेषताओं के आधार पर की गई है, जिनमें पृष्ठीय पंख (डॉर्सल फिन) का उद्गम सिर के मध्य भाग से पहले होना, सिर का अपेक्षाकृत अधिक गहरा रंग तथा थूथन (स्नाउट) का धूसर से गहरा भूरा रंग शामिल है। विस्तृत आकारिकीय परीक्षणों के साथ आणविक विश्लेषणों ने भी इसे एक नई प्रजाति के रूप में पुष्टि की।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ)

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