1 अगस्त, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप–राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर), नई दिल्ली ने 1 अगस्त, 2026 को अपनी स्वर्ण जयंती और 51वां स्थापना दिवस मनाया। यह आयोजन भारत के पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, अभिलक्षणन (Characterization) और उपयोग में 50 वर्षों की उत्कृष्ट उपलब्धियों के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
इस समारोह में डॉ. आर.एस. परोदा, अध्यक्ष, ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (टीएएएस), ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम में डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृनुप), श्री जी.डी. त्रिपाठी. अतिरिक्त सचिव (डेयर) एवं सचिव (भाकृअनुप) तथा डॉ. एन.के. सिंह, जे.सी. बोस फेलो, भाकृअनुप–राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, सहित अनेक विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने मुख्य वक्तव्य में डॉ. आर.एस. परोदा ने पादप आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन के भविष्य के लिए ‘सप्तऋषि’ अवधारणा को एक रणनीतिक रोडमैप के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने फसलों के जंगली संबंधियों (Crop Wild Relatives) के व्यापक संग्रहण, राष्ट्रीय जीन बैंक के आधुनिकीकरण, आनुवंशिक संसाधन संरक्षण प्रणालियों को भविष्य के अनुरूप सुदृढ़ बनाने, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, डिजिटल डेटा एवं डिजिटल सीक्वेंस सूचना (DSI) प्लेटफॉर्म के विकास, वैश्विक जीनोमिक प्रशासन को मजबूत करने तथा प्री-ब्रीडिंग कार्यक्रमों और सामुदायिक बीज बैंकों के सहयोग से जीन बैंक से खेत तक एक निर्बाध श्रृंखला के माध्यम से फसल सुधार को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. एम.एल. जाट ने भाकृअनुपॉ-एनबीपीजीआर को पांच दशकों की समर्पित सेवा पूर्ण करने पर बधाई दी और पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में इसके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय जीन बैंक को फसल सुधार कार्यक्रमों से प्रभावी रूप से जोड़ने के लिए प्री-ब्रीडिंग गतिविधियों को सुदृढ़ करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने संस्थागत नेटवर्किंग को मजबूत कर राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन मूल्यांकन मिशन को और अधिक गति देने तथा आनुवंशिक संसाधनों के न्यायसंगत साझाकरण हेतु सुदृढ़ कानूनी ढांचे के माध्यम से भारत को अंतरराष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन प्रशासन में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

अपने संबोधन में श्री जी.डी. त्रिपाठी ने भाकृअनुप-एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को 50 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर बधाई दी तथा सेफ्टी कॉपी जीन बैंक की स्थापना से जुड़े रहने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे देश की दीर्घकालिक संरक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
संस्थान की वार्षिक उपलब्धि रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप, ने वर्ष के दौरान की गई कई प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें सेफ्टी कॉपी जीन बैंक और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग सुविधा की स्थापना शामिल है। उन्होंने सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना, पादप संगरोध (Plant Quarantine) सेवाओं तथा जर्मप्लाज्म संरक्षण गतिविधियों में प्राप्त प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण 13वां डॉ. हरभजन सिंह स्मृति व्याख्यान रहा, जिसे प्रोफेसर एन.के. सिंह ने प्रस्तुत किया। उन्होंने फसल आनुवंशिक संसाधनों से मात्रात्मक लक्षण स्थलों (Quantitative Trait Loci - QTLs) की पहचान और उनके उपयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने धान, टमाटर, गेहूं, अरहर, जूट और आम से संबंधित जीनोम अनुक्रमण परियोजनाओं में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला तथा बताया कि ये उपलब्धियां फसल सुधार में तेजी लाने और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं। कार्यक्रम में आईसीएआर-एनबीपीजीआर के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित अनेक प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया, जो पादप आनुवंशिक संसाधन अनुसंधान और संरक्षण में संस्थान के वैज्ञानिक योगदान को प्रदर्शित करते हैं।
सेफ्टी कॉपी जीन बैंक की स्थापना तथा डीएनए-आधारित अनुसंधान और आधुनिक जीनोमिक उपकरणों पर संस्थान का बढ़ता जोर भारत की अमूल्य पादप आनुवंशिक विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन पहलों से आनुवंशिक संसाधनों के सतत संरक्षण और उपयोग को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी तथा भविष्य के वैज्ञानिकों और पादप प्रजनकों को खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि विकास से संबंधित उभरती चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम बनाया जा सकेगा।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली)







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