भाकृअनुप–एनएमआरआई, हैदराबाद द्वारा खाद्य सूक्ष्मजैविकी एवं अवशेष निगरानी प्रयोगशालाओं में मापन अनिश्चितता तथा निर्णय नियमों के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर प्रशिक्षण का आयोजन

भाकृअनुप–एनएमआरआई, हैदराबाद द्वारा खाद्य सूक्ष्मजैविकी एवं अवशेष निगरानी प्रयोगशालाओं में मापन अनिश्चितता तथा निर्णय नियमों के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर प्रशिक्षण का आयोजन

20-22 मई, हैदराबाद

भाकृअनुप–राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–एनएमआरआई), हैदराबाद, ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के प्रायोजन से 20–22 मई, 2026 के दौरान ‘खाद्य सूक्ष्मजैविकी एवं अवशेष निगरानी प्रयोगशालाओं में मापन अनिश्चितता तथा निर्णय नियमों के व्यावहारिक अनुप्रयोग’ विषय पर तीन दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्लेषणात्मक परीक्षण में मापन अनिश्चितता एवं निर्णय नियमों के सटीक आकलन, तथा अनुप्रयोग के संबंध में खाद्य विश्लेषकों की तकनीकी दक्षताओं को सुदृढ़ कर राष्ट्रीय खाद्य परीक्षण प्रणाली को मजबूत एवं समन्वित बनाना था।

मुख्य अतिथि सम्मान के रूप में उपस्थित डॉ. एस. वैथियानाथन, पूर्व निदेशक एवं एनएबीएल लीड असेसर, भाकृअनुप–एनएमआरआई, ने कहा कि भारत खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराने के लिए मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना तथा खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता विश्लेषण से जुड़े पेशेवरों की क्षमता निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए भाकृअनुप–एनएमआरआई की सराहना की।

ICAR–NMRI, Hyderabad Organises Training on Practical Application of Measurement Uncertainty and Decision Rules in Food Microbiology and Residue Monitoring Laboratories

अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. एस.बी. बारबुद्धे, निदेशक, भाकृअनुप–एनएमआरआई, ने देश में खाद्य सुरक्षा एवं पोषण सुरक्षा के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाकृअनुप–एनएमआरआई, विशेष रूप से मांस सुरक्षा एवं गुणवत्ता आश्वासन के क्षेत्र में, एफएसएसएआई के सहयोग से राष्ट्रीय खाद्य नियामक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में सक्रिय योगदान दे रहा है। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने तथा व्यापार को सुगम बनाने के लिए वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, विश्लेषणात्मक विश्वसनीयता तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत प्रयोगशाला पद्धतियों के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में मापन अनिश्चितता के सिद्धांतों एवं उसके आकलन, अनुरूपता मूल्यांकन में निर्णय नियमों के अनुप्रयोग, विश्लेषणात्मक परिणामों की व्याख्या तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नियामक मानकों के अनुपालन पर गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

देशभर की विभिन्न राज्य एवं राष्ट्रीय खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं से कुल चौदह खाद्य विश्लेषकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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