भाकृअनुप-एसबीआई, कोयंबटूर ने अट्टापडी के जनजातीय समुदायों के बीच पोषण, स्वास्थ्य एवं गुड़ उद्यमिता को बढ़ावा दिया

भाकृअनुप-एसबीआई, कोयंबटूर ने अट्टापडी के जनजातीय समुदायों के बीच पोषण, स्वास्थ्य एवं गुड़ उद्यमिता को बढ़ावा दिया

22 जून, 2026, कोयंबटूर

जनजातीय समुदायों के पोषण, स्वास्थ्य एवं आजीविका के अवसरों में सुधार लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान (भाकृअनुप-एसबीआई), कोयंबटूर ने भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), पलक्कड़ के सहयोग से आज केरल के अट्टापडी पहाड़ियों के मेलाचूट्रा बस्ती में एक व्यापक जागरूकता अभियान का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संस्थान की अनुसूचित जनजाति घटक विकास कार्ययोजना (डीएपीएसटीसी) परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएपीएसटीसी परियोजना के प्रतिनिधियों ने अट्टापडी के जनजातीय समुदायों में एनीमिया की उच्च व्यापकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की 70 प्रतिशत से अधिक किशोरियां एनीमिया से प्रभावित हैं, जिसका मुख्य कारण अपर्याप्त पोषण है। इस चुनौती से निपटने के लिए भाकृअनुप-एसबीआई रसोई बागवानी हेतु सब्जी बीज किट, मोटे अनाज (मिलेट) के बीज तथा संस्थान द्वारा उत्पादित तरल गुड़ (लिक्विड जैगरी) के वितरण जैसी व्यावहारिक पहलों को बढ़ावा दे रहा है, ताकि परिवारों के पोषण स्तर में सुधार किया जा सके।

ICAR-SBI, Coimbatore promotes Nutrition, Health and Jaggery Entrepreneurship among Attappady tribals

मेलाचूट्रा बस्ती में आयोजित अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन प्लॉट के माध्यम से गन्ने की नई किस्म को 14012 (Co 14012) के उत्साहजनक प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला गया। इस बात पर विश्वास व्यक्त किया गया कि आईसीएआर-केवीके, पलक्कड़ द्वारा प्रस्तावित लघु स्तर की गुड़ उत्पादन इकाई की स्थापना से आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे तथा अधिक जनजातीय किसान गन्ने की खेती अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

श्री एम. गोविंदराज, सहायक कृषि निदेशक, अगाली ने किसानों को केरल सरकार की "एरिया एक्सपेंशन ऑफ शुगरकेन" योजना के बारे में जानकारी दी, जिसके अंतर्गत गन्ना खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹20,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने जनजातीय किसानों से इस योजना का लाभ उठाकर कृषि आय बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर गन्ना उत्पादन को मजबूत करने का आग्रह किया।

भाकृअनुप-केवीके, पलक्कड़ ने क्षेत्र में गन्ना खेती तथा मूल्य संवर्धित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए भाकृअनुप-केवीके, भाकृअनुप-एसबीआई तथा राज्य कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्रों में कृषि, स्वास्थ्य एवं उद्यमिता विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गईं। अलंगादन गुड़ के उत्पादन एवं सफल विपणन के अनुभव साझा किए गए तथा इसे ग्रामीण उद्यम के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों को कार्यक्रम के दौरान वितरित सब्जी बीज किट का उपयोग कर घरेलू पोषण वाटिका की स्थापना एवं प्रबंधन का प्रशिक्षण भी दिया गया।

जनजातीय महिलाओं को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया गया तथा अभियान के दौरान वितरित प्राथमिक उपचार (फर्स्ट-एड) किट के सही उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग एवं सतत फसल पोषण प्रबंधन पर भी एक सत्र आयोजित किया गया।

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खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत रागी के बीजों का एजोस्पिरिलम (Azospirillum) एवं फॉस्फोबैक्टीरिया (Phosphobacteria) जैसे तरल जैव उर्वरकों से बीजोपचार का प्रदर्शन भी किया गया।

जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने उनके कल्याण से सीधे जुड़े विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए आयोजक संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कृषि उपकरण, घरेलू उपयोग की सामग्री, तरल गुड़, रेडियो सेट, प्राथमिक उपचार किट तथा गुणवत्तापूर्ण बीज सामग्री सहित उपयोगी सामग्री के वितरण की भी सराहना की।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण 150 से अधिक जनजातीय प्रतिभागियों द्वारा कुपोषण के विरुद्ध सामुदायिक शपथ लेना रहा, जिसमें उन्होंने अपने गांवों की महिलाओं एवं बच्चों के पोषण स्तर तथा समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अभियान में 150 से अधिक जनजातीय निवासी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से कुपोषण, एनीमिया, पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता तथा उद्यमिता विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान करना था।

(स्रोत: भाकृअनुप-गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर)

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