29 अगस्त, 2026, आंध्र प्रदेश
डॉ. राजबीर सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि प्रसार), भाकृअनुप, ने आज श्री वेंकटेश्वर पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (एसवीवीयू) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, गुंटूर में नवनिर्मित किसान छात्रावास का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस सुविधा से केवीके के आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों, किसानों के साथ संवाद और प्रौद्योगिकी प्रसार गतिविधियों को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
श्री बी. रामांजनेयुलु, विधायक, गुंटूर जिला; डॉ. जे.वी. रमना, कुलपति, एसवीवीयू; डॉ. शेख एन. मीरा, निदेशक, भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन X, हैदराबाद; और डॉ. बी. शोभामणि, निदेशक, प्रसार, एसवीवीयू सहित स्थानीय प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

एल नीनो जागरूकता, जलवायु-लचीली कृषि और उच्च-घनत्व रोपण प्रणाली (एचडीपीएस) कपास की खेती पर विशेष ध्यान देते हुए एक किसान मेला भी आयोजित किया गया। किसानों को एल नीनो के संभावित प्रभावों और कृषि उत्पादकता को बनाए रखने के लिए उपयुक्त जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्नत किस्मों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मूंगफली की ‘विशिष्ट’ किस्म के बीज वितरित किए गए।
सभा को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए डॉ. राजबीर सिंह ने किसान-केन्द्रित प्रसार गतिविधियों को मजबूत करने में केवीके गुंटूर की पहलों की सराहना की। उन्होंने जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकियों के प्रसार, किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद और वैज्ञानिक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने केवीके को किसानों के साथ मिलकर काम करने, जमीनी स्तर की चुनौतियों का समाधान करने और एचडीपीएस कपास सहित जलवायु-लचीली प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने उत्पादकता और आजीविका में सुधार के लिए किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि उद्यमियों को अधिक सहायता देने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

डॉ. शेख एन. मीरा ने वैज्ञानिकों और कृषक समुदाय के बीच संपर्क को मजबूत करने में केवीके गुंटूर के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रदर्शनों, तकनीकी परामर्श और जमीनी स्तर की प्रसार गतिविधियों के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कृषि आय और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए जलवायु-स्मार्ट कृषि, उन्नत किस्मों, एचडीपीएस कपास, उद्यमिता विकास और मूल्य संवर्धन को महत्वपूर्ण माध्यमों के रूप में भी रेखांकित किया।
गणमान्य व्यक्तियों ने मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों और कृषि उद्यमियों के साथ बातचीत की तथा उनके अनुभवों, केवीके प्रशिक्षण के माध्यम से अर्जित कौशल और उद्यमशीलता गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने किसानों और ग्रामीण युवाओं के बीच कौशल विकास, ग्रामीण उद्यमिता और वैकल्पिक आय-सृजन के अवसरों को बढ़ावा देने में केवीके के प्रयासों की सराहना की।

किसानों ने भी गणमान्य व्यक्तियों के साथ संवाद किया और अपने जमीनी स्तर के अनुभवों तथा चिंताओं को साझा किया। किसान–वैज्ञानिक संवाद को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों, जलवायु-लचीली कृषि और समय पर तकनीकी परामर्श के महत्व पर जोर दिया गया। किसानों ने केवीके परिसर में नवनिर्मित किसान छात्रावास का उपयोग करते हुए भविष्य के आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने में रुचि व्यक्त की।
कार्यक्रम में कुल 458 किसानों, अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशिक्षुओं, कृषि उद्यमियों और केवीके कर्मचारियों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन X, हैदराबाद)







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