30 जून, 2026, चेन्नई
डॉ. जे.के. जेना, उप-महानिदेशक (मत्स्य विज्ञान), भाकृअनुप, ने संस्थान की चल रही राष्ट्रीय प्रमुख अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए भाकृअनुप–केंद्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान (भाकृअनुप–सीआईबीए), चेन्नई का दौरा किया।
डॉ. कुलदीप के. लाल, निदेशक, भाकृअनुप–सीआईबीए, ने प्रत्येक परियोजना के अंतर्गत प्राप्त प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया तथा प्रमुख उपलब्धियों एवं मील के पत्थरों पर प्रकाश डाला।
दौरे के दौरान डॉ. जेना ने मुट्टुकाडु स्थित हैचरी परिसर में जैव-सुरक्षित जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक सुविधा व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण मछली प्रजातियों की जीन-संपादित किस्मों के विकास में सहायक होगी, जिससे उनकी वृद्धि एवं उत्पादन में सुधार होगा। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा वित्तपोषित परियोजना "तटीय समुदायों को सशक्त बनाने तथा उच्च मूल्य की मछलियों की उत्पादकता एवं मूल्य श्रृंखला बढ़ाने के लिए उद्यमिता एवं क्लस्टर आधारित मत्स्य पालन मॉडल" के अंतर्गत स्थापित सीबास मॉड्यूलर हैचरी का भी उद्घाटन किया।
डॉ. जेना ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) द्वारा वित्तपोषित सुपर-इंटेंसिव प्रिसिजन एंड नेचुरल श्रिम्प फार्मिंग (एसआईपीएनएसएफ) सुविधा का भी उद्घाटन किया तथा नर्सरी में तैयार झींगा शिशुओं को 1,000 टन क्षमता वाले एचडीपीई ग्रो-आउट टैंकों में छोड़ा।
इसके बाद उन्होंने भाकृअनुप–सीबा की आजीविका विकास पहलों से जुड़े वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा लाभार्थियों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने भाकृअनुप द्वारा वित्तपोषित अखिल भारतीय अलंकरणीय मत्स्य प्रजनन एवं संवर्धन नेटवर्क परियोजना के अंतर्गत विकसित दो अलंकरणीय जलीय प्रजातियों—पोर्सिलेन क्रैब (Petrolisthes monodi) तथा मैंग्रोव पाइपफिश (Ichthyocampus carce)—का विमोचन किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सार्वजनिक समुद्री एक्वेरियम वीजीपी मरीन किंगडम को हैचरी में तैयार अलंकरणीय केकड़ों एवं पाइपफिश की पहली खेप की आपूर्ति भी देखी।
संवाद बैठक के दौरान एम/एस मयंक एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड, गुजरात तथा एम/एस पोसाइडन एंटरप्राइजेज, गुजरात के साथ एसआईपीएनएसएफ परियोजनाओं की स्थापना के लिए छह समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इसके अतिरिक्त इग्निट टेक्निकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई नामक स्टार्ट-अप कंपनी के साथ स्वचालित मछली अपशिष्ट प्रसंस्करण मशीन के संयुक्त विकास के लिए एक सहयोगात्मक पहल भी शुरू की गई। प्रस्तावित प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मछली बाजार के अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना तथा उससे मूल्य संवर्धित उत्पादों का उत्पादन करना है।
एम/एस उदय एक्वा कनेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद के साथ आंध्र प्रदेश में एकीकृत सीबास एवं समुद्री शैवाल एक्वापार्क की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसी प्रकार एम/एस आदित्य एक्वा एजेंसीज, आंध्र प्रदेश के साथ डॉ. जेना एवं डॉ. लाल की उपस्थिति में सीबास एवं मड क्रैब हैचरी की स्थापना हेतु एक अन्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
एम/एस डी-नोम प्राइवेट लिमिटेड, तेलंगाना के साथ 'सीबा ईएचपी ऑनसाइट डिटेक्ट' के व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक लाइसेंस समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह तालाब किनारे उपयोग किया जाने वाला एक निदान किट है, जो झींगा रोगजनक एंटेरोसाइटोज़ून हेपाटोपेनेई (EHP) की त्वरित पहचान के लिए विकसित किया गया है। यह किट महंगी प्रयोगशाला अवसंरचना की आवश्यकता के बिना खेत पर ही 10–15 मिनट के भीतर रोग की पहचान करने में सक्षम है।
संस्थान की प्रसार गतिविधियों के अंतर्गत डॉ. जेना ने खारे पानी की जलीय कृषि से जुड़े किसानों के लाभ के लिए "पर्लस्पॉट के बीज उत्पादन एवं पालन पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)" शीर्षक पुस्तिका का विमोचन किया।
डॉ. जेना ने भाकृअनुप–सीआईबीए द्वारा आयोजित 'खेत बचाओ अभियान' के समापन समारोह में भी भाग लिया। एक माह तक चले इस जागरूकता अभियान के दौरान किसानों को भाकृअनुप–सीआईबीए द्वारा विकसित प्लैंकटनप्लस (PlanktonPlus) एवं हॉर्टीप्लस (HortiPlus) उत्पादों के उपयोग के माध्यम से मृदा उर्वरता एवं फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्थान-विशिष्ट संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूक किया गया, जिससे सतत कृषि को बढ़ावा मिल सके।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय खारे पानी की जलीय कृषि संस्थान, चेन्नई)







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