भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने 80वां स्थापना दिवस के आयोजन के तहत सतत अंतर्देशीय मत्स्य पालन एवं ब्लू इकोनॉमी के प्रति दोहराई प्रतिबद्धताtment to Sustainable Inland Fisheries and Blue Economy

भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने 80वां स्थापना दिवस के आयोजन के तहत सतत अंतर्देशीय मत्स्य पालन एवं ब्लू इकोनॉमी के प्रति दोहराई प्रतिबद्धताtment to Sustainable Inland Fisheries and Blue Economy

19 मार्च, 2026, कोलकाता

भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएफआरआई), बैरकपुर, कोलकाता, ने आज अपना 80वां स्थापना दिवस मनाया, जो अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान एवं विकास में आठ दशकों की उत्कृष्ट उपलब्धियों का प्रतीक है। वर्ष 1947 में स्थापित इस संस्थान ने सतत अंतर्देशीय मत्स्य पालन को बढ़ावा देने तथा भारत की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वर्षों के दौरान भाकृअनुप–सिफरी ने मत्स्य विज्ञान में अनेक महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिनमें प्रेरित प्रजनन, समेकित मत्स्य पालन, जलाशय एवं आर्द्रभूमि प्रबंधन, हिल्सा संरक्षण, एनक्लोजर कल्चर तथा बड़े पैमाने पर नदी संवर्धन शामिल हैं। इन नवाचारों के साथ-साथ उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास ने मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ किया है और इसे एक लचीले, तकनीक-आधारित एवं समावेशी भविष्य की ओर अग्रसर किया है।

ICAR–CIFRI, Kolkata Celebrates 80th Foundation Day, Reaffirms Commitment to Sustainable Inland Fisheries and Blue Economy

वर्तमान में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में लगभग 8% योगदान देता है, जिसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का हिस्सा 75% से अधिक है। इस विकास में भाकृअनुप–सिफरी की स्थापना से ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. प्रबीर कुमार घोष, कुलपति, विश्वभारती विश्वविद्यालय, उपस्थित रहे और उन्होंने देश के मत्स्य क्षेत्र को आकार देने में संस्थान के योगदान की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय विकास में वैज्ञानिक प्रगति के महत्व पर जोर दिया।

डॉ तीर्थ कुमार दत्ता, कुलपति, पश्चिम बंगाल पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में भाकृअनुप–सिफरी के निरंतर प्रयासों की सराहना की।

डॉ अशोक कुमार पात्रा, कुलपति, बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय ने संस्थान की क्रांतिकारी तकनीकों को देश में ब्लू रिवोल्यूशन को गति देने वाला बताया।

डॉ प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप–सिफरी ने संस्थान की विरासत तथा अंतर्देशीय खुले जल मत्स्य पालन, जैव विविधता संरक्षण एवं हितधारकों के सशक्तिकरण में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने ड्रोन एवं सेंसर आधारित प्रणालियों जैसी जलवायु-सहिष्णु एवं उन्नत तकनीकों के एकीकरण पर बल देते हुए ब्लू इकोनॉमी और “वन हेल्थ” दृष्टिकोण के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। साथ ही उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेषकर शून्य भूख, पोषण सुरक्षा और लैंगिक समानता के क्षेत्र में भाकृअनुप–सिफरी की भूमिका को रेखांकित किया।

ICAR–CIFRI, Kolkata Celebrates 80th Foundation Day, Reaffirms Commitment to Sustainable Inland Fisheries and Blue Economy

डॉ. गौरंगा कर, निदेशक, भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान तथा डॉ. डी.बी. शाक्यवार, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान ने भी संस्थान की प्रभावशाली अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों की सराहना की।

इस अवसर पर “सतत ब्लू इकोनॉमी को आगे बढ़ाने हेतु परिस्थिति-विशिष्ट प्रौद्योगिकी लक्ष्यीकरण” विषय पर एक क्रिएटिव सॉल्यूशंस लैब का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं मिशनों के साथ समन्वय की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को “महिला किसान वर्ष” घोषित किए जाने के अनुरूप भी था, जिसमें कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता दी गई। इस अवसर पर चमता, कुंडिपुर, सिंद्रानी, अकैयूर और खालसी आर्द्रभूमियों से 48 महिला मत्स्य पालकों ने सक्रिय भागीदारी की।

इस अवसर पर भाकृअनुप–सिफरी द्वारा “सिफरी-क्लीनमीन”नामक एक पर्यावरण-अनुकूल, जल में घुलनशील उत्पाद भी लॉन्च किया गया, जो खाद्य पौधों के अर्क से विकसित किया गया है। यह उत्पाद 24 घंटे के भीतर लाल रक्त वाली खरपतवार मछलियों को समाप्त करता है, जबकि श्वेत रक्त वाले जलीय जीवों को सुरक्षित रखता है। यह तालाब की तैयारी, झींगा पालन तथा जीवित मछलियों की पकड़ के लिए उपयुक्त है। साथ ही “पश्चिम बंगाल का कृषि संक्षिप्त विवरण और भाकृअनुप इंटरफ़ेस” नामक प्रकाशन भी जारी किया गया।

ICAR–CIFRI, Kolkata Celebrates 80th Foundation Day, Reaffirms Commitment to Sustainable Inland Fisheries and Blue Economy

कार्यक्रम में मेधावी छात्रों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। इस आयोजन में वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों, मत्स्य पालकों एवं उद्यमियों ने भाग लिया, जो भाकृअनुप–सिफरी की यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

नवाचार, सतत विकास एवं समावेशी वृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भाकृअनुप–सिफरी, “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य के अनुरूप एक मजबूत मत्स्य क्षेत्र के निर्माण में निरंतर योगदान दे रहा है।

(स्रोतः भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता)

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