भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्स्थलीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने त्रिपुरा में संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को सतत मत्स्य पालन से जोड़ा

भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्स्थलीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान ने त्रिपुरा में संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को सतत मत्स्य पालन से जोड़ा

29 अप्रैल, 2026, त्रिपुरा

पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तथा आर्थिक दृष्टि से लाभकारी जलीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्स्थलीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केन्द्र, गुवाहाटी, ने आज पश्चिम त्रिपुरा जिले के हेजामारा ब्लॉक में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम त्रिपुरा सरकार के मत्स्य विभाग के सहयोग से पिसीकल्चर नॉलेज सेंटर के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया।

इस पहल का उद्देश्य हितधारकों को जलीय कृषि प्रणालियों की उत्पादकता तथा स्थिरता निर्धारित करने में मृदा स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में अंधाधुंध एवं गैर-वैज्ञानिक उर्वरक उपयोग पर निर्भरता कम करने तथा आवश्यकता-आधारित संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर विशेष बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मत्स्य तालाबों में मृदा की उपयुक्त स्थिति बनाए रखना जल गुणवत्ता के नियमन, प्राकृतिक उत्पादकता बढ़ाने और मछलियों की स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है, जिससे उत्पादन एवं लाभप्रदता दोनों में वृद्धि होती है।

ICAR-CIFRI, Links Soil Health Management with Sustainable Fisheries through a Campaign on Balanced Use of Fertilisers in Tripura

कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चाओं में समय-समय पर मृदा परीक्षण, जैविक एवं अकार्बनिक उर्वरकों के उचित चयन तथा उपयोग, एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन रणनीतियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया गया। इन उपायों को दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने, लागत कम करने तथा पर्यावरणीय जोखिमों को न्यूनतम करने के लिए आवश्यक बताया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग 100 हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी की, जिनमें केज मत्स्य पालक, वैज्ञानिक, मत्स्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और मीडिया कर्मी शामिल थे। संवादात्मक सत्रों ने ज्ञान के आदान-प्रदान और व्यावहारिक सीख को बढ़ावा दिया, जिससे प्रतिभागियों को सतत जलीय कृषि के वैज्ञानिक सिद्धांतों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने इस आवश्यकता को रेखांकित किया कि क्षेत्र में एक सुदृढ़ एवं उत्पादक जलीय कृषि क्षेत्र के निर्माण हेतु मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और मत्स्य विकास को समग्र दृष्टिकोण के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्स्थलीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता)

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