भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा दक्षिण अंडमान में ग्रीष्मकालीन फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने हेतु धान की परती भूमि में तिल की खेती के लिए फील्ड डे का आयोजन

भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा दक्षिण अंडमान में ग्रीष्मकालीन फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने हेतु धान की परती भूमि में तिल की खेती के लिए फील्ड डे का आयोजन

20 अप्रैल, 2026, श्री विजया पुरम

भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा आज दक्षिण अंडमान के चौलदारी गाँव में किसानों के प्रदर्शन खेत पर ‘द्वीपीय परिस्थितियों में धान परती भूमि में तिल की खेती’ विषय पर एक फील्ड डे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को धान कटाई के बाद खाली पड़ी भूमि में ग्रीष्मकालीन मौसम के दौरान तिल की खेती की संभावनाओं के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान भाकृअनुप-सीआईएआरआई के वैज्ञानिकों ने तिल की उपयुक्त किस्मों, विशेषकर जेसीएस-2454 और कुम्स-17, के प्रदर्शन, उपयुक्त बुवाई समय, अनुशंसित कृषि पद्धतियों तथा ग्रीष्मकालीन मौसम में तिल की खेती के लाभों के बारे में जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि तिल एक अल्पावधि एवं लाभकारी फसल है, जिसमें अंडमान द्वीप समूह में फसल विविधीकरण की अच्छी संभावनाएं हैं।

फील्ड डे के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को धान परती भूमि में टिकाऊ तिल उत्पादन हेतु उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में भी जागरूक किया। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग तथा जैविक खादों और रासायनिक उर्वरकों के समन्वित प्रयोग के महत्व के बारे में जानकारी दी गई, जिससे मृदा स्वास्थ्य बनाए रखते हुए फसल उत्पादकता में वृद्धि की जा सके। वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा कि संतुलित उर्वरीकरण न केवल उपज एवं उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाता है, बल्कि अनावश्यक उर्वरक व्यय को कम करता है, मृदा क्षरण को रोकता है साथ ही द्वीपीय परिस्थितियों में दीर्घकालिक कृषि स्थिरता को भी समर्थन प्रदान करता है।

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डॉ. जय सुंदर, निदेशक (कार्यवाहक), भाकृअनुप-सीआईएआरआई ने किसानों से धान कटाई के बाद भूमि को खाली छोड़ने के बजाय धान परती क्षेत्रों में तिल की खेती अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि धान परती तिल की खेती किसानों की आय बढ़ाने, वर्तमान फसल प्रणाली में विविधता लाने, मुख्य भूमि से खाद्य तेल पर निर्भरता कम करने तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती है।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र दक्षिण अंडमान तथा अंडमान प्रशासन के कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी भाग लिया।

लगभग 30 किसानों ने फील्ड डे में भाग लिया तथा वैज्ञानिकों के साथ तिल की खेती और द्वीपों में इसकी भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान)

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