25 फरवरी 2026, चेन्नई
भाकृअनुप-केन्द्रीय खारा जल जलजीव पालन संस्थान, चेन्नई, ने तमिलनाडु में ‘अनुसूचित जाति परिवारों के लिए आजीविका विकास एवं रोजगार सृजन हस्तक्षेप के रूप में एशियन सीबास की नर्सरी पालन’ विषय पर एक जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।
भाकृअनुप-सीबा ने अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए खारे पानी (ब्रैकिशवॉटर) के सामुदायिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए एक आर्थिक रूप से व्यवहार्य आजीविका मॉडल विकसित किया है। यह पहल एशियन सीबास की नर्सरी पालन को एक टिकाऊ एवं आय सृजन करने वाले उद्यम के रूप में बढ़ावा देने पर केन्द्रित है।

नर्सरी में पाले गए सीबास फिंगरलिंग (10–12.5 सेमी) की मांग काफी अधिक है, जिन्हें ग्रो-आउट तालाबों और केज में स्टॉक करने के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि हैचरी सामान्यतः 2 सेमी से कम आकार के फ्राई ही उपलब्ध कराती हैं। यह मध्यवर्ती नर्सरी चरण, जिसमें 75–90 दिनों में फ्राई को फिंगरलिंग आकार तक बढ़ाया जाता है, एक महत्वपूर्ण और आर्थिक रूप से लाभकारी गतिविधि के रूप में उभरा है। श्रम-प्रधान होने के कारण यह उद्यम लाभार्थी समूहों को सुनिश्चित आय और रोजगार के अवसर प्रदान करता है।
डॉ. कुलदीप के. लाल, निदेशक, भाकृअनुप-सीबा ने बताया कि संस्थान ने तटीय समुदायों द्वारा आसानी से अपनाए जाने योग्य एक संपूर्ण तकनीकी पैकेज विकसित किया है। इस पैकेज में छोटे नेट केज, गुणवत्तापूर्ण बीज, फीड तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण सहायता शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भाकृअनुप-सीबा विभिन्न तटीय राज्यों में अनुसूचित जाति परिवारों की सक्रिय भागीदारी के साथ इस मॉडल का सफलतापूर्वक प्रदर्शन कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान, डॉ. लाल ने लाभार्थी समूहों द्वारा सीबास नर्सरी पालन से अर्जित ₹4.68 लाख की आय का वितरण किया, जिससे इस पहल की आर्थिक व्यवहार्यता और प्रभाव को रेखांकित किया गया।
आर. शर्मिला, संयुक्त निदेशक, मत्स्य पालन, नागपट्टिनम क्षेत्र, तमिलनाडु सरकार ने अपने संबोधन में बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भारत सरकार महिलाओं एवं एससी/एसटी लाभार्थियों को एशियन सीबास नर्सरी पालन को समूह आधारित आजीविका गतिविधि के रूप में अपनाने के लिए 40% अनुदान प्रदान करती है। उन्होंने प्रतिभागियों को योजना का लाभ लेने हेतु तमिलनाडु के मत्स्य विभाग से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया।

तकनीकी सत्र में भाकृअनुप-सीबा के वैज्ञानिकों ने दृश्य सामग्रियों की सहायता से सीबास नर्सरी पालन तकनीक पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में पूम्पुहार के निकट माथमपट्टिनम गांव स्थित ICAR-CIBA के सीबास नर्सरी प्रदर्शन इकाई का फील्ड भ्रमण भी शामिल था, जहां प्रतिभागियों को नर्सरी प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।
यह जागरूकता-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित एक परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे भाकृअनुप-सीबा, तमिलनाडु, में क्रियान्वित कर रहा है।
सिरकाली तालुक के तटीय गांवों से लगभग 150 प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया, जो इस आजीविका विकल्प के प्रति समुदाय की गहरी रुचि को दर्शाता है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय खारा जल जलजीव पालन संस्थान, चेन्नई)







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