7 मई, 2026, हैदराबाद
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत मृदा स्वास्थ्य नीति के विकास की दिशा में क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है, ताकि खाद्य सुरक्षा, जलवायु सहनशीलता, किसानों की आजीविका और जनस्वास्थ्य के लिए आवश्यक जीवंत रणनीतिक संपदा के रूप में भारत की मिट्टियों की सुरक्षा, पुनर्स्थापन और सतत संरक्षण हेतु एक राष्ट्रीय रूपरेखा तैयार की जा सके।
इस पहल के अंतर्गत दक्षिण भारत के लिए भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने कृषि विज्ञान उन्नति ट्रस्ट, नई दिल्ली तथा डॉ रेड्डीज फाउंडेशन, हैदराबाद के सहयोग से आज आईसीएआर-क्रिडा, हैदराबाद में भारत मृदा स्वास्थ्य नीति पर एक परामर्श कार्यशाला आयोजित की।
कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के 110 से अधिक अधिकारी, आईसीएआर एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों सहित शोधकर्ता एवं शिक्षाविद, गैर-सरकारी संगठन, किसान प्रतिनिधि, किसान तथा उर्वरक, जैव उर्वरक, जल प्रबंधन, बीज एवं अन्य संबंधित क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

डॉ. ए.के. नायक, उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रभाग), भाकृअनुप ने भारत मृदा स्वास्थ्य नीति की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मृदा निगरानी रूपरेखा एवं मृदा प्रबंधन रूपरेखा सहित मृदा स्वास्थ्य ढाँचे के निर्माण तथा राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय तंत्र के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विकसित रूपरेखा की निगरानी के लिए आवश्यक न्यूनतम डाटा सेट को अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरल एवं प्रभावी ढाँचे विकसित किए जाने चाहिए।
उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिडा ने सभी विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत किया तथा मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोधकर्ताओं, किसानों, गैर-सरकारी संगठनों, नीति निर्माताओं एवं निजी क्षेत्र को एक मंच पर लाना है, ताकि कृषि समुदाय के हित में उपयोगी सुझाव भारत मृदा स्वास्थ्य नीति के विकास हेतु दिए जा सकें।
डॉ. एम. मोहंती, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय मृदा विज्ञान अनुसंदान संस्थान, भोपाल, डॉ. बी. वेंकटेश्वरलू, पूर्व कुलपति, वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (वीएनएमकेवी), डॉ. ए.के. सिंह, पूर्व कुलपति, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्व विद्यालय (आरवीएसकेवीव), ग्वालियर, डॉ. बीएस द्विवेदी, पूर्व सदस्य, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) और डॉ. डी. राजी रेड्डी, कुलति, श्री कोंडा लक्ष्मण तेलंगाना बागवानी विश्वविद्यालय (एसकेएलटीजीएचयू ) भी उद्घाटन सेशन में मौजूद थे।

उद्घाटन कार्यक्रम के बाद समानांतर सत्र आयोजित किए गए। कार्यशाला के दौरान विभिन्न सत्रों में मृदा स्वास्थ्य चुनौतियाँ, पारंपरिक ज्ञान, प्रोत्साहन, अपेक्षाएँ, वर्तमान योजनाओं के साथ समन्वय, नियामकीय अंतराल, वैज्ञानिक प्राथमिकताएँ, डाटा प्रणाली, मृदा वर्गीकरण, मृदा कार्बनिक पदार्थ की सीमा, समाधान, नवाचार श्रृंखला तथा विस्तार में आने वाली बाधाओं जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
यह कार्यशाला विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर मृदा स्वास्थ्य शासन की रूपरेखा, प्रमुख मुद्दों, चुनौतियों तथा रणनीतिक दिशाओं पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करती है, ताकि भारत के लिए एक व्यापक मृदा स्वास्थ्य नीति विकसित की जा सके। कार्यशाला में कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों एवं मृदा प्रकारों के आधार पर क्षेत्रीय मानकों और आवश्यकताओं को संकलित किया गया, जिससे राष्ट्रीय मानक, राज्य-विशिष्ट कार्ययोजना तथा स्थानीय स्तर की कार्यान्वयन रणनीतियों के विकास में सहायता मिलेगी।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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