भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, फेक ने भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेडज़ीफेमा तथा भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन VII, उमियाम के सहयोग से नागालैंड सरकार के साथ मिलकर ‘प्रोजेक्ट रिवाइव’ के अंतर्गत कार्य किया। यह दूरदर्शी पहल फेक जिला जेल प्राधिकरण के सहयोग से लागू की गई, जिसका उद्देश्य कौशल विकास एवं सतत आजीविका हस्तक्षेपों के माध्यम से जेल बंदियों के पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्समावेशन को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सतत आजीविका के अवसर सृजित करने में कृषि-आधारित कौशल विकास के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने के लिए आईसीएआर–केवीके फेक द्वारा संचालित विभिन्न विस्तार गतिविधियों एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई। साथ ही, रिहाई के बाद बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने में कृषि की परिवर्तनकारी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत वर्मी कम्पोस्टिंग पर एक व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। बंदियों को सरल एवं कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग कर जैव अपघटनीय कार्बनिक अपशिष्ट को पोषक तत्वों से भरपूर वर्मी कम्पोस्ट में परिवर्तित करने की वैज्ञानिक विधियों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में जैविक अपशिष्ट पुनर्चक्रण के महत्व, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन को एक सतत आय-सृजन उद्यम के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को भी शामिल किया गया।

The initiative equipped prison inmates with practical agricultural skills to promote self-employment, इस पहल ने जेल बंदियों को रिहाई के बाद स्वरोजगार, उद्यमिता एवं सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक कृषि कौशलों से सुसज्जित किया। प्रोजेक्ट रिवाइव में अपनी भागीदारी के माध्यम से भाकृअनुप–केवीके फेक ने पुनर्वास एवं सामाजिक सशक्तिकरण के प्रभावी साधन के रूप में कृषि नवाचार एवं कौशल विकास का उपयोग करते हुए समावेशी ग्रामीण विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।
(स्रोत: कृषि विज्ञान केन्द्र – फेक, भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, नागालैंड)







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