25 मई, 2026, मालदा
मालदा के प्रतिष्ठित आमों की वैश्विक बाजार क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत कार्यरत भाकृअनुप-केवीके (केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान), मालदा ने एपीडा, कोलकाता के सहयोग से भाकृअनुप-सीआईएसएच केवीके, मालदा में “निर्यात हेतु गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए आम में अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपी) पर एक दिवसीय कार्यशाला सह क्रेता–विक्रेता बैठक (बीएसएम)” का आयोजन किया।
पश्चिम बंगाल के आम जिले के रूप में प्रसिद्ध मालदा में प्रतिवर्ष लगभग 3.5 लाख टन आम का उत्पादन होता है। इसके बावजूद निर्यात गुणवत्ता वाले फलों की सीमित उपलब्धता इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बाधित करती है। इस चुनौती से निपटने के लिए आयोजित इस कार्यशाला में जिले भर से लगभग 100 प्रगतिशील आम उत्पादक किसान, निर्यातक, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), वैज्ञानिक, अधिकारी तथा अन्य हितधारक शामिल हुए और अवशेष-मुक्त, अनुरेखणीय (ट्रेसेबल) तथा निर्यात मानकों के अनुरूप आम उत्पादन के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में भाकृअनुप-केवीके (सीआईएसएच), मालदा के प्रमुख डॉ. डी.के. राघव ने वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, छंटाई, फल बैगिंग तथा अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के पालन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस मौसम में भाकृअनुप-सीआईएसएच द्वारा आम किसानों के बीच लगभग 2.5 लाख फल बैग वितरित किए गए, ताकि फल बैगिंग तकनीक को अपनाकर फलों की गुणवत्ता और निर्यात उपयुक्तता में सुधार किया जा सके।
वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, आईसीएआर-अटारी, कोलकाता, ने कहा कि निर्यात-उन्मुख मालदा आमों का उभरना किसान-केन्द्रित और स्टार्टअप-आधारित मूल्य श्रृंखला की ताकत को दर्शाता है, जहाँ वैज्ञानिक मार्गदर्शन, बाजार संपर्क और गुणवत्ता आश्वासन एक साथ चलते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) के अनुरूप अवशेष-सुरक्षित आम उत्पादन के लिए लेबल-अनुरूप कीटनाशक उपयोग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) को अपनाना आवश्यक है। क्रेता–विक्रेता संबंधों में अनुरेखणीयता और गुणवत्ता प्रमाणीकरण के महत्व पर बल देते हुए डॉ. डे ने जीआई-टैग प्राप्त किस्मों के पंजीकरण, वैज्ञानिक स्प्रे अनुसूचियों के पालन तथा भाकृअनुप द्वारा विकसित तकनीकों के व्यापक उपयोग की वकालत की, ताकि निर्यात तैयारी को मजबूत किया जा सके, किसानों की आय बढ़ाई जा सके और मालदा आमों को वैश्विक प्रीमियम बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने बाग पंजीकरण, अनुरेखण प्रणाली, विकिरण (इर्रेडिएशन) उपचार, पैकहाउस संचालन तथा आम निर्यात के लिए आवश्यक मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) सहित निर्यात प्रोटोकॉल पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मालदा आमों की स्थिति मजबूत करने के लिए क्लस्टर-आधारित जीएपी अपनाने तथा किसानों की अधिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला ने किसानों और निर्यातकों के बीच खुली चर्चा के लिए भी एक मंच प्रदान किया। निर्यात क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने बताया कि मालदा की प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्र के रूप में प्रतिष्ठा होने के बावजूद, निर्यातकों को निर्यात-ग्रेड फलों की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण अक्सर जिले के बाहर से आम खरीदने पड़ते हैं। फलों की बाहरी सतह पर दाग-धब्बों तथा कटाई के बाद गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम में व्यावहारिक आयाम जोड़ते हुए जीएपी और गैर-जीएपी आमों की तुलनात्मक प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही फल बैगिंग, आईपीएम उपकरणों, फल मक्खी प्रबंधन, वैज्ञानिक कटाई, ग्रेडिंग तथा कटाई-पश्चात प्रबंधन पर प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी आयोजित किए गए। किसानों ने वैज्ञानिकों और निर्यातकों से सीधे संवाद कर निर्यात गुणवत्ता मानकों, खरीद प्रक्रियाओं और बाजार की अपेक्षाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
क्रेता–विक्रेता संवाद सत्र ने उत्पादकों, निर्यातकों और बाजार से जुड़े पक्षों के बीच सार्थक सहभागिता को बढ़ावा दिया, जिससे निर्यात अवसरों के विस्तार के लिए अच्छी कृषि पद्धतियों, आधारभूत संरचना विकास, ग्रेडिंग, शीत श्रृंखला प्रबंधन तथा पैकहाउस सुविधाओं के महत्व को बल मिला। कार्यक्रम में प्रमुख निर्यातकों और निर्यातक संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन इस आशावादी विश्वास के साथ हुआ कि जीएपी, वैज्ञानिक खेती पद्धतियों और उन्नत तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाकर मालदा को निर्यात गुणवत्ता वाले आम उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे किसानों के लिए वैश्विक प्रीमियम बाजारों में नए अवसर खुलेंगे।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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