11 जून, 2026, हैदराबाद
भारत सरकार और भाकृअनुप के आह्वान के प्रत्युत्तर में किसानों के बीच उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने सेव द फील्ड कैंपेन 2026 (खेत_बचाओ_अभियान) का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत भाकृअनुप-क्रिडा, हैदराबाद, ने आज तेलंगाना राज्य के यादाद्री-भुवनगिरि जिले के पोचमपल्ली मंडल के इंद्रियाला गांव में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक जागरूकता अभियान आयोजित किया।
इस कार्यक्रम का आयोजन किसानों की वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों के प्रति समझ को बढ़ाने के लिए किया गया, ताकि फसल उत्पादकता में सुधार हो, मृदा स्वास्थ्य बना रहे और पर्यावरण के अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिले। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन (एसटीबीएनएम) के महत्व पर प्रकाश डाला, जो फसलों की स्थान-विशिष्ट पोषक तत्व आवश्यकताओं का निर्धारण करने की एक प्रमुख पद्धति है।

पौधों की वृद्धि, विकास और उपज निर्माण में आवश्यक स्थूल पोषक तत्वों (एन, पी, के) तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिकाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रतिभागियों को उर्वरकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग के दुष्परिणामों, जिनमें पोषक तत्व उपयोग की अक्षमता, मृदा क्षरण, पोषक तत्वों का दोहन, पर्यावरण प्रदूषण तथा फसलों की प्रतिक्रिया में कमी शामिल हैं, के प्रति भी जागरूक किया गया।
विशेषज्ञों ने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) रणनीतियों को अपनाने पर बल दिया, जिनमें संतुलित पोषक तत्व आपूर्ति प्राप्त करने और मृदा उर्वरता में सुधार के लिए रासायनिक उर्वरकों, जैविक खादों, फसल अवशेषों और जैव उर्वरकों का संयोजन शामिल है। पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने संबंधी अनुशंसाओं पर भी चर्चा की गई। किसानों को दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता, मृदा संसाधन संरक्षण और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सतत पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बैठक में लगभग 64 किसानों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)







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