18 जून, 2026, बैरकपुर
भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-क्रिजाफ), बैरकपुर ने आज अपने परिसर में कृषक सभा / खेत बचाओ अभियान का आयोजन किया, जिसमें जूट क्षेत्र से जुड़े किसान, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की महिला सदस्य, वैज्ञानिक, विस्तार कर्मी तथा अन्य हितधारक शामिल हुए।
मुख्य अतिथि, पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं उद्यानिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती ने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका में सुधार के लिए वैज्ञानिक कृषि, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और उद्यमिता के महत्व पर जोर दिया। मंत्री ने विविधीकृत जूट-आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन में संलग्न महिला स्वयं सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना की और उन्हें नवाचार, कौशल विकास तथा सामूहिक विपणन पहलों के माध्यम से अपने उद्यमों का और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, मंत्री ने उपस्थित जनसमूह को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जागरूक किया और प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, हरी खाद, जैव उर्वरकों आदि को अपनाने तथा "खेत बचाओ अभियान" में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।

अपने स्वागत संबोधन में डॉ. गौरांग कर, निदेशक, भाकृअनुप-क्रिजाफ, ने जूट तथा संबद्ध रेशा फसलों के लिए किसान-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला, जिनमें उन्नत किस्में, एकीकृत फसल प्रबंधन पद्धतियां, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन प्रौद्योगिकियां, मशीनीकरण, रेटिंग प्रौद्योगिकियां और मूल्य संवर्धित उत्पाद शामिल हैं। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मृदा में अकार्बनिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करने के लिए हरी खाद के उपयोग का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान गणमान्य व्यक्तियों ने क्षेत्रीय प्रयोगों, कौशल विकास केंद्र तथा सटीक कीटनाशी छिड़काव में ड्रोन के उपयोग के प्रदर्शन का अवलोकन किया। मंत्री ने किसानों के बीच धान और हरी खाद वाली फसलों की उच्च उपज वाली किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीज वितरित किए। उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि उपकरण और स्प्रेयर भी वितरित किए गए।
इस कार्यक्रम में 100 से अधिक किसान, महिला किसान, स्वयं सहायता समूहों के सदस्य, वैज्ञानिक, राज्य सरकार के अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता)







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