3–7 मार्च, 2026, कोलकाता
भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-अटारी), कोलकाता, में जोन-V के नव-नियुक्त वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) प्रमुखों के लिए आयोजित प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) का तृतीय एवं अंतिम चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
यह व्यापक तीन-चरणीय कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि प्रसार प्रभाग, भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी तथा विभिन्न भाकृअनुप-अटारी द्वारा संयुक्त रूप से परिकल्पित एवं क्रियान्वित किया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से केवीके के नव-नियुक्त वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं प्रमुखों के लिए आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने केवीके को जिला स्तर के गतिशील कृषि-प्रौद्योगिकी केंद्रों के रूप में विकसित करने की दूरदर्शी रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने नवाचार को पारिस्थितिक स्थिरता, लैंगिक समावेशन एवं पर्यावरणीय संरक्षण के साथ एकीकृत करने पर जोर दिया। “विकसित भारत @2047” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप उन्होंने केवीके प्रमुखों से जमीनी स्तर पर परिवर्तनकारी एजेंट के रूप में कार्य करने का आह्वान किया।

अपने “सुव्यवस्थित नेतृत्व के लिए सोच को आकार दें" विषयक प्रस्तुतीकरण में डॉ प्रदीप डे ने वैल्यू स्ट्रीम मैपिंग, काइज़न, लीन मैनेजमेंट तथा सिक्स सिग्मा जैसी आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रसार तंत्र में दक्षता, सटीकता एवं निरंतर सुधार की संस्कृति को समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इसकी प्रभावशीलता एवं पहुँच को बढ़ाया जा सके।
प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के पूर्व चरणों से प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें प्रेरणादायक एवं भविष्य के कार्यों के लिए मार्गदर्शक बताया।
इन अनुभवों के आधार पर प्रतिभागियों को परिणामोन्मुखी कार्य सौंपे गए, जिनमें संसाधन जुटाने हेतु परियोजना प्रस्ताव तैयार करना, “एक जिला एक उत्पाद” पहल को आगे बढ़ाना तथा जिला स्तर के विकास एवं नवाचार में विषय-विशेष योगदान की पहचान करना शामिल था। इन कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के इस संकल्प के साथ हुआ कि वे जमीनी स्तर पर प्रभावी, प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि प्रसार सेवाओं को सुदृढ़ करने में केवीके की भूमिका को और मजबूत बनाएंगे।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान)







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