5 मई, 2026, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने आज अपने परिसर में “ग्रीष्मकालीन सब्जियां फील्ड डे” का सफल आयोजन किया। “सब्जी बीज क्षेत्र में साझेदारी को सुदृढ़ बनाना” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में बीज उद्योगों के प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
फील्ड भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को ग्रीष्मकालीन प्रमुख सब्जियों की उन्नत संकर एवं मुक्त परागित किस्मों से परिचित कराया गया। इनमें खरबूजा, करेला, खीरा, मिर्च और टमाटर शामिल थे। ये किस्में उच्च उत्पादन क्षमता, बेहतर गुणवत्ता तथा विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूलन के लिए जानी जाती हैं।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. चिरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में सब्जियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बीज क्षेत्र में सार्वजनिक–निजी भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भाकृअनुप-संस्थान द्वारा विकसित सब्जियों की किस्मों एवं संकरों का देशभर में, विशेष रूप से आईसीएआर-संस्थान के क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से, बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया जाना चाहिए ताकि इनके व्यापक स्तर पर अपनाने को बढ़ावा मिल सके।
डॉ. राव ने कुकुर्बिट फसलों में ट्रेलिसिंग (मचान प्रणाली) और मल्चिंग जैसी उन्नत खेती तकनीकों को अपनाने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा उन्नत किस्मों और संकरों के व्यापक प्रसार की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

संवाद सत्र के दौरान बीज उद्योग के प्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों ने प्रदर्शित किस्मों के प्रदर्शन और संभावनाओं की सराहना करते हुए अपने सुझाव साझा किए।
इस कार्यक्रम में डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद, डॉ. आर.एन. पडारिया तथा डॉ. सी. विश्वनाथन सहित कई विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
फील्ड डे में लगभग 50 हितधारकों ने भाग लिया और यह कार्यक्रम संवाद, ज्ञान आदान-प्रदान तथा विशेष रूप से प्रौद्योगिकी प्रसार एवं व्यवसायीकरण के क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ।
इस कार्यक्रम ने उन्नत ग्रीष्मकालीन सब्जी किस्मों की क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया तथा भारत में सब्जी बीज क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के प्रति भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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