₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्तियों एवं फेलोशिप से 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ
10 अगस्त, 2026, नई दिल्ली
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने आज कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में शिक्षा और अनुसंधान कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियों एवं फेलोशिप के वितरण हेतु राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली का शुभारंभ किया। इस प्रणाली का शुभारंभ भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली में किया गया। इसका उद्देश्य वित्तीय सहायता के वितरण को अधिक कुशल, पारदर्शी, समयबद्ध और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।
नई प्रणाली के तहत ₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्तियाँ एवं फेलोशिप 6,000 से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की जा रही हैं, जिससे उन्हें वित्तीय सहायता समय पर और बिना किसी बाधा के प्राप्त हो सकेगी।

इस प्रणाली का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छात्रवृत्ति का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब वित्तीय सहायता विद्यार्थियों तक उनकी आवश्यकता के समय पहुंचे। उन्होंने कहा कि एनएसपी-सक्षम डीबीटी प्रणाली के माध्यम से छात्रवृत्तियों एवं फेलोशिप का समयबद्ध, प्रत्यक्ष और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित होगा।
कृषि शिक्षा की व्यापक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि राष्ट्र सेवा और भारतीय कृषि के रूपांतरण में योगदान देने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण एक सामूहिक प्रयास है और कृषि के विद्यार्थी तथा युवा वैज्ञानिक देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने भारतीय कृषि को सशक्त बनाने में ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था और समाज की आधारशिला है तथा कृषि शिक्षा को सुदृढ़ करना और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने कहा कि विद्यार्थियों का सशक्तीकरण अंततः किसानों के कल्याण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाकृअनुप के प्रयास केवल विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान लाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इन अवसरों का लाभ किसानों की बेहतर आजीविका, समृद्धि और कल्याण में भी परिलक्षित होना चाहिए। उन्होंने बदलते समय के अनुरूप कृषि शिक्षा में निरंतर सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को ऐसा ज्ञान, वैज्ञानिक क्षमता और नवाचारी सोच प्रदान की जानी चाहिए, जिससे वे किसानों की समस्याओं के सार्थक समाधान विकसित कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान श्री संदीप सरकार, अपर सचिव, डीएआरई एवं वित्तीय सलाहकार, भाकृअनुप ने एनएसपी-सक्षम डीबीटी आईसीएआर छात्रवृत्ति/फेलोशिप कार्यप्रवाह का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता के प्रत्यक्ष हस्तांतरण के लिए विकसित सरल और सुव्यवस्थित व्यवस्था की जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. यशपाल सिंह मलिक, उप-महानिदेशक (कृषि शिक्षा), भाकृअनुप के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कृषि शिक्षा में सुधारों को आगे बढ़ाने में फेलोशिप की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फेलोशिप ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले संस्थानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, जिससे कृषि और देश दोनों का विकास संभव होता है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर भाकृअनुप-आईएआरआई के विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता उनकी शिक्षा और अनुसंधान गतिविधियों को आगे बढ़ाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
एनएसपी-सक्षम डीबीटी प्रणाली का शुभारंभ छात्रवृत्तियों और फेलोशिप के वितरण में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रत्यक्ष और समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर यह पहल सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक बाधाएं विद्यार्थियों की शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की यात्रा में रुकावट न बनें तथा वे भारतीय कृषि के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)







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