7 अगस्त 2026, कोलकाता
भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (भाकृअनुप-निनफेट), कोलकाता, ने आज कोलकाता में जूट उत्पाद विविधीकरण योजना (जेपीडीएस) के अंतर्गत क्रियान्वित अनुसंधान एवं विकास (आर एवं डी) परियोजनाओं पर एक प्रसार संगोष्ठी तथा वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, के राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी) के न्यू एज फाइबर मिशन (एनएएफएम) पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य जेपीडीएस के अंतर्गत संचालित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के परिणामों का प्रसार करना तथा हितधारकों के बीच सतत विकास, आजीविका सृजन एवं प्राकृतिक रेशा क्षेत्र के विविधीकरण के लिए न्यू एज फाइबर की संभावनाओं, उपयोगों तथा भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मुख्य अतिथि श्री संजय कुमार पाणिग्रही, प्रबंध निदेशक, जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) ने कृषक समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया और देश के विकास में योगदान देने के उनके प्रयासों के समर्थन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आश्वासन दिया कि न्यू एज फाइबर अपनाने वाले किसानों को जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जेसीआई) द्वारा हर संभव सहयोग और अवसर प्रदान किए जाएंगे।

विशिष्ट अतिथि डॉ. डी.बी. शक्यवार, निदेशक, भाकृअनुप-निनफेट, कोलकाता, ने कृषक समुदाय से आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने तथा उत्पादकता, मूल्य संवर्धन, सतत विकास और आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए न्यू एज फाइबर के विविध उपयोगों का अन्वेषण करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को भी आधुनिक कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को एक आशाजनक करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय कृषि और संबद्ध क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं तथा विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं विविधीकरण के समावेशन के साथ इसका भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।
विशिष्ट अतिथि स्वामी कलेशनंद ने प्रतिभागियों को भारतीय कृषि में उभरते रुझानों और कृषक समुदाय की विकसित होती कार्यप्रणालियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने न्यू एज फाइबर को एक महत्वपूर्ण कृषि फसल के रूप में अपनाने से जुड़ी संभावनाओं तथा चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और हितधारकों को सततता एवं आजीविका सृजन के दृष्टिकोण से इसकी संभावनाओं का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. महादेब दत्ता, संयुक्त निदेशक, राष्ट्रीय जूट बोर्ड, ने न्यू एज फाइबर मिशन (एनएएफएम) के महत्व पर प्रकाश डाला और न्यू एज फाइबर को बढ़ावा देने, तकनीकी उन्नति, विविधीकरण तथा रेशा एवं वस्त्र क्षेत्र के भविष्य पर उनके संभावित प्रभाव में इसकी भूमिका का विस्तार से वर्णन किया।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण परिणाम ‘सस्य श्यामला’ कृषि विज्ञान केन्द्र, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता तथा भाकृअनुप-निनफेट, कोलकाता द्वारा न्यू एज फाइबर आधारित सतत वस्त्र उत्पादों पर सहयोगात्मक अनुसंधान, विस्तार गतिविधियों और व्यावसायीकरण के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने में पारस्परिक रुचि व्यक्त करना रहा। प्रस्तावित सहयोग से ज्ञान साझाकरण, प्रौद्योगिकी प्रसार, क्षेत्र-स्तरीय हस्तक्षेपों तथा नवाचारी प्राकृतिक रेशा आधारित उत्पादों के संवर्धन को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत एक तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें भाकृअनुप-निनफेट, राष्ट्रीय जूट बोर्ड (एनजेबी), इंडियन जूट इंडस्ट्रीज़ रिसर्च एसोसिएशन (आईजीआरए) तथा आईआईटी गुवाहाटी के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने न्यू एज फाइबर से संबंधित विभिन्न नवाचारी प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान विकासों और अनुप्रयोगों पर तकनीकी प्रस्तुतियाँ दीं। इस सत्र ने उभरती प्रौद्योगिकियों, मूल्य संवर्धन, उत्पाद विविधीकरण और न्यू एज फाइबर की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की, साथ ही शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के बीच ज्ञान साझाकरण और संवाद को भी प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में उद्योगों के प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों सहित लगभग 50 हितधारकों ने भाग लिया। विचार-विमर्श ने शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, किसानों और अन्य हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया, जिसमें सहयोग को सुदृढ़ करने और प्राकृतिक रेशा क्षेत्र में नवाचारी प्रौद्योगिकियों को अपनाने एवं उनके व्यावसायीकरण में तेजी लाने पर विशेष बल दिया गया।
संगोष्ठी का समापन सतत प्राकृतिक रेशों को बढ़ावा देने, किसान-उद्योग-अनुसंधान संबंधों को मजबूत करने, युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा सतत विकास और आजीविका सृजन के लिए नवाचारी रेशा-आधारित प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता)







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