भाकृअनुप-प्रायोजित वर्षा पर निर्भर जैविक कृषि प्रणाली पर शीतकालीन स्कूल का समापन

भाकृअनुप-प्रायोजित वर्षा पर निर्भर जैविक कृषि प्रणाली पर शीतकालीन स्कूल का समापन

17 फरवरी, 2026, हैदराबाद

भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद, में “वर्षा पर निर्भर आधारित जैविक कृषि प्रणाली में हाल के विकास” पर 21 दिन का भाकृअनुप-प्रायोजित शीतकालीन स्कूल आज सफलतापूर्वक खत्म हो गया। यह प्रोग्राम 28 जनवरी से 17 फरवरी, 2026 तक चला, जो वर्षा पर निर्भर और बारानी क्षेत्रों के लिए टिकाऊ जैविक खेती के तरीकों में व्यवसायिकों की काबिलियत को मजबूत करने के मकसद से एक गहन क्षमता निर्माण का नतीजा था।

ICAR-Sponsored Winter School on Rainfed Organic Farming Systems Concludes

समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रोफेसर अरुण तिवारी, पूर्व वैज्ञानिक, डीआरडीओ, मौजूद थे। अपने संबोधन में, प्रोफेसर तिवारी ने भारत में एआई आधारित जैविक खेती व्यवस्था पर जोर दिया ताकि वर्षा पर निर्भर पारिस्थितिकी तंत्र में भूमि क्षरण, जलवायु परिवर्तनशीलता और रिसोर्स की कमी जैसी बढ़ती चुनौतियों का सामना किया जा सके। उन्होंने प्रतिभागियों को बधाई दी और उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में टिकाऊ जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए मिली जानकारी को अप्लाई करने हेतु बढ़ावा दिया।

प्रोग्राम की शुरुआत डॉ. के.ए. गोपीनाथ, कोर्स के निदेशक के गर्मजोशी से स्वागत और संक्षिप्त विवरण के साथ हुई, जिन्होंने 21 दिन के शीतकालीन स्कूल की सीख एवं नतीजों पर रोशनी डाली। प्रोग्राम में जाने-माने वैज्ञानिक और विशेषज्ञ के अनुभवी व्याख्यान, संवादात्मक विमर्श, व्यवहारिक सत्र और क्षेत्र आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल शामिल थे।

डॉ. वी.के. सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-क्रीडा, के ने अपनी बातों में पूरे प्रोग्राम के दौरान ट्रेनी के सक्रिय भागीदारी और जोश की तारीफ की। उन्होंने मिट्टी की हेल्थ को बेहतर बनाने, पोषण चक्र में सुधार करने, इकोसिस्टम की मजबूती को मजबूत करने और बदलते मौसम में सूखी जमीन पर खेती की लंबे समय तक चलने वाली ‘टिकाऊपन सुनिश्चित करने में ऑर्गेनिक खेती की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया।

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समापन सत्र के दौरान, प्रतिभागियों ने वर्षा पर निर्भर जैविक उत्पादन व्यवस्था की असल दुनिया की चुनौतियों से निपटने में ट्रेनिंग की अहमियत और इस्तेमाल पर ज़ोर देते हुए अपना फीडबैक और विचार शेयर किए। प्रोग्राम ने अलग-अलग संस्थानों के प्रोफेशनल के बीच अंतर-विषयक लर्निंग, अनुभव शेयर करने तथा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)

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