18 अगस्त, 2026, मुजफ्फरपुर, बिहार
भाकृअनुप–राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र (भाकृअनुप-एनआरसीएल), मुजफ्फरपुर, ने लीची स्टिंक बग के प्रबंधन के लिए अपने क्षमता निर्माण एवं क्षेत्रीय जागरूकता प्रयासों को तेज कर दिया है। यह प्रमुख कीट लीची उत्पादन के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में उभरकर सामने आया है, विशेष रूप से बिहार और झारखंड के कई लीची उत्पादक क्षेत्रों में।
यह पहल केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के निर्देश पर गठित लीची स्टिंक बग टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर शुरू की गई है। आईसीएआर-एनआरसीएल इस कार्यक्रम को बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय तथा आईसीएआर–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आटारी), पटना के सहयोग से संचालित कर रहा है। इसका उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों, विस्तार एजेंसियों और किसान समुदायों की भागीदारी से समन्वित कीट प्रबंधन प्रयासों को सुदृढ़ करना है।

प्रतिभागियों में कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) के विषय विशेषज्ञ, जिला उद्यान पदाधिकारी, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी, सहायक निदेशक (पादप संरक्षण), कृषि समन्वयक, सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक (एटीएम) तथा प्रखंड प्रौद्योगिकी प्रबंधक (बीटीएम) शामिल थे, विशेष रूप से मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों से।
प्रशिक्षण में लीची स्टिंक बग की पहचान एवं जीवविज्ञान, इसकी मौसमी जनसंख्या गतिशीलता, लीची के अतिरिक्त अन्य आश्रय पौधों और समूह बनने वाले स्थलों की पहचान, ऑफ-सीजन कीट निगरानी तथा एकीकृत प्रबंधन उपायों को समय पर अपनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस बात पर भी जोर दिया गया कि फूल आने और फल लगने से काफी पहले ही कीट प्रबंधन हस्तक्षेप शुरू किए जाएं, ताकि कीटों की संख्या आर्थिक क्षति के स्तर तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित की जा सके।
तकनीकी ज्ञान को खेत स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने के उद्देश्य से आईसीएआर-एनआरसीएल ने गंभीर रूप से प्रभावित लीची उत्पादक क्षेत्रों में फील्ड डे और जागरूकता कार्यक्रमों की एक श्रृंखला भी शुरू की है। पहला फील्ड डे मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां प्रखंड में संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र तथा बिहार सरकार के उद्यान निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया गया।
फील्ड डे के दौरान किसानों और क्षेत्रीय विस्तार कर्मियों को संभावित कीट समूह बनने वाले स्थलों की पहचान तथा आगामी लीची मौसम से पहले लीची स्टिंक बग की अवशिष्ट आबादी को कम करने के उपायों के बारे में जागरूक किया गया।

बिहार के अन्य प्रभावित लीची उत्पादक क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के फील्ड कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। ये कार्यक्रम सीधे किसानों के खेतों पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि किसान–विस्तार–अनुसंधान के बीच समन्वय को मजबूत किया जा सके और अनुशंसित कीट प्रबंधन उपायों को समय पर अपनाने में सुविधा हो।
इस समन्वित पहल के माध्यम से भाकृअनुप-एनआरसीएल का उद्देश्य प्रशिक्षित विस्तार कर्मियों का एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करना तथा लीची उत्पादकों के बीच जागरूकता बढ़ाना है, जिससे समुदाय स्तर और क्षेत्रव्यापी स्तर पर लीची स्टिंक बग का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। इस पहल से फसल हानि को कम करने और देश के प्रमुख लीची उत्पादक क्षेत्रों में टिकाऊ लीची उत्पादन को सुदृढ़ करने की अपेक्षा की जा रही है।
इस पहल के अंतर्गत बिहार के प्रमुख लीची उत्पादक जिलों के विस्तार कर्मियों के लिए दो-दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कुल 68 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें 10–11 अगस्त 2026 को आयोजित पहले कार्यक्रम में 30 प्रतिभागी तथा 17–18 अगस्त, 2026 को आयोजित दूसरे कार्यक्रम में 38 प्रतिभागी शामिल थे।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर)







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