भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, पोर्बा, ने चल रहे खेत बचाओ अभियान के तहत ज़ेलोमी, किक्रुमा, चिज़ामी, अपर खोमी, खेझाकेनों और फित्सुरोमी गांवों के गांव बुरास (जीबी), ग्राम परिषद अध्यक्षों (वीसीसी) और ग्राम परिषद सदस्यों की सहभागिता के साथ एक सरपंच सम्मेलन का आयोजन किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर के नेताओं में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा एकीकृत पशुधन कृषि प्रणालियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, ताकि कृषि आय में वृद्धि हो सके और सतत कृषि सुनिश्चित की जा सके।

प्रतिभागियों को फार्म यार्ड मैन्योर (एफवाईएम) तथा अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग के महत्व के प्रति भी जागरूक किया गया, जिससे मृदा उर्वरता में सुधार, मृदा में जैविक पदार्थ की वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी लाई जा सके।
भाग लेने वाले ग्राम नेताओं को प्रोत्साहित किया गया कि वे इन वैज्ञानिक एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपने-अपने गांवों के किसानों के बीच प्रसारित करें, ताकि पूरे क्षेत्र में लचीली, पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तथा जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा सके।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेदज़िफेमा, नागालैंड)







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